फेडरेशन के साथ मैराथन बैठक में मुख्य सचिव का आश्वासन—जायज मांगों पर जल्द होगा सकारात्मक निर्णय’
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नवा रायपुर|छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में आज उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से सौजन्य भेंट कर कर्मचारियों की लंबित 11 सूत्रीय मांगों का विस्तृत कच्चा चिट्ठा पेश किया। इस मुलाकात ने न केवल संवाद के बंद दरवाजों को खोला है, बल्कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान और भविष्य के प्रति एक नई उम्मीद भी जगा दी है।
मुख्य सचिव का स्पष्ट रुख: “दबाव नहीं, स्वेच्छा से करें सहयोग”
बैठक के दौरान आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली पर उपजी तकनीकी समस्याओं पर भी बेबाक चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि:
”इस व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों पर नियम विरुद्ध दबाव न बनाया जाए। शासकीय सेवकों को स्वेच्छा से सहयोग करना चाहिए ताकि शासन की छवि निखरे।”
ज्वलंत मुद्दों पर ‘फोकस’ और समाधान का रोडमैप
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने बेहद मजबूती के साथ कर्मचारियों के पक्ष को रखा। वार्ता के मुख्य केंद्र बिंदु रहे:
- DA एरियर्स: एरियर्स की राशि को तत्काल GPF खाते में समायोजित करना।
- वेतन विसंगति: लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के संवर्गों की विसंगतियों का त्वरित निराकरण।
- अवकाश नगदीकरण: 300 दिवस अर्जित अवकाश के नगदीकरण की पुरानी मांग।
- पेंशनर कल्याण: झारखंड और उत्तराखंड की तर्ज पर पेंशनरों को 3% लंबित महंगाई राहत और कैशलेस चिकित्सा सुविधा।
संविदा नियुक्तियों पर लगाम और नई भर्ती के संकेत
फेडरेशन ने विभागों में सक्षम अधिकारियों के होने के बावजूद सेवानिवृत्त अधिकारियों को दी जा रही संविदा नियुक्तियों पर गंभीर आपत्ति जताई। इस पर मुख्य सचिव ने न केवल सहमति जताई, बल्कि रिक्त पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का भी भरोसा दिया।



7 साल का सूखा होगा खत्म !
पिछले सात वर्षों से लंबित ‘राज्य स्तरीय परामर्शदात्री समिति’ की बैठक न होने से कर्मचारियों में भारी आक्रोश था। मुख्य सचिव ने इस नाराजगी को भांपते हुए जल्द ही समिति की बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया है, जिसे फेडरेशन की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।
आभार और अभिनंदन
बैठक के अंत में फेडरेशन ने कैशलेस सुविधा, बीमा योजना और अर्जित वेतन ऋण प्रणाली लागू करने के लिए मुख्य सचिव का अभिनंदन किया।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल:
संयोजक कमल वर्मा के साथ पवन कुमार शर्मा (उप संयोजक), चंद्रशेखर तिवारी (महासचिव), बी.पी. शर्मा, संजय सिंह, पंकज पांडेय, जी.आर. चंद्रा और जय कुमार साहू जैसे दिग्गज नेता मौजूद रहे।
इस महत्वपूर्ण मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ सरकार कर्मचारियों को ‘प्रशासन की रीढ़’ मानती है और उनके समर्पण का सम्मान करने के लिए तैयार है। अब नजरें सरकार के अगले ‘ठोस निर्णय’ पर टिकी हैं।




