नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर|छत्तीसगढ़ की नगरीय व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव अब पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में आ गए हैं। रायपुर के सर्किट हाउस में दिनभर चली मैराथन समीक्षा बैठक में श्री साव का सख्त तेवर देखने को मिला। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि जनता की समस्याओं से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है।
बड़ी कार्रवाई: ‘काम में सुस्ती तो विदाई तय’
धमतरी में पेयजल योजना की कछुआ चाल से नाराज उपमुख्यमंत्री ने मौके पर ही कार्यपालन अभियंता (EE) को निलंबित करने का आदेश सुना दिया। साथ ही, संबंधित ठेकेदार पर भारी पेनाल्टी थोपने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई प्रदेश के अन्य निकायों के लिए एक कड़ी चेतावनी है।

अभियान ‘स्थाई समाधान’: साव के कड़े फरमान
1. पेयजल संकट पर ‘डेडलाइन’
”सिर्फ फाइलें न दौड़ाएं, प्यास बुझाएं।” उपमुख्यमंत्री ने अगले एक वर्ष के भीतर प्रदेश के सभी निकायों में पेयजल समस्या के स्थाई निराकरण का लक्ष्य दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि बजट खपाना उद्देश्य नहीं, समाधान उद्देश्य होना चाहिए।
2. अवैध प्लॉटिंग पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’



शहरों का स्वरूप बिगाड़ने वाले अवैध कॉलोनाइजर्स और अवैध निर्माण पर कड़ाई बरतने को कहा गया है। श्री साव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसी गतिविधियों पर तत्काल लगाम लगाएं, वरना जवाबदेही तय की जाएगी।
3. मानसून से पहले ‘अग्निपरीक्षा’
- 31 मई तक सफाई: नाले-नालियों की सफाई हर हाल में पूरी हो।
- सरप्राइज चेकिंग: जून के पहले हफ्ते में राज्य स्तरीय टीम औचक निरीक्षण करेगी। जल भराव हुआ, तो सीधे स्वास्थ्य अधिकारी और इंजीनियर जिम्मेदार होंगे।
पीएम आवास: सितंबर 2026 तक हर सिर पर होगी छत

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा करते हुए श्री साव ने लक्ष्य निर्धारित किया:
- डेडलाइन: सभी अधूरे मकान सितंबर 2026 तक पूरे हों।
- प्रोत्साहन: 18 महीने में घर पूरा करने वाले हितग्राहियों को ₹32,850 की अतिरिक्त बोनस राशि ‘मुख्यमंत्री गृह प्रवेश सम्मान योजना’ के तहत तत्काल प्रदान की जाए।
इन मुद्दों पर भी चला ‘समीक्षा का चाबुक’
बैठक में पीएम स्वनिधि के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को लोन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए भूजल पुनर्भरण, और अमृत मिशन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने तकनीक और नई कार्यपद्धति अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि “नगर निगम मॉडल बनें ताकि छोटी निकायें उनसे प्रेरणा ले सकें।”
कल की बारी: नगर निगमों और पालिकाओं के बाद, उपमुख्यमंत्री कल (21 अप्रैल) को नगर पंचायतों के कामकाज का हिसाब-किताब लेंगे। अधिकारियों में खौफ है कि कल भी गाज गिर सकती है।




