जाते-जाते भी समाज को संवारने की सोच : मनेन्द्रगढ़ में 75 साल के बुजुर्ग रामाशंकर गुप्ता का अनुकरणीय कदम

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मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा की अनूठी पहल: 75 वर्षीय समाजसेवी ने मेडिकल कॉलेज को देह समर्पित करने की घोषणा की

नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़ : जीवन में समाज के काम आना तो हर कोई चाहता है, लेकिन मृत्यु के बाद भी आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य और मानव कल्याण के लिए अपना शरीर समर्पित कर देना महानता की पराकाष्ठा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के पावन अवसर पर मनेन्द्रगढ़ के 75 वर्षीय बुजुर्ग रामाशंकर गुप्ता ने देहदान का ऐतिहासिक संकल्प लेकर समाज के सामने अनुकरणीय और अनुकरणीय सामाजिक व मानवीय मिसाल पेश की है।

विधिवत घोषणा पत्र किया तैयार

​गांधी चौक मनेन्द्रगढ़ निवासी रामाशंकर गुप्ता ने अपनी अंतिम इच्छा के अनुसार विधिवत शपथपूर्वक देहदान का घोषणा पत्र तैयार किया है। उन्होंने 2 अक्टूबर को अपने हस्ताक्षर के साथ इस महान संकल्प की पुष्टि की।

मेडिकल छात्रों के अध्ययन और अंग प्रत्यारोपण में आएगा काम

​घोषणा पत्र के अनुसार, सक्षम चिकित्सकों द्वारा ब्रेन डेड घोषित किए जाने या मृत्यु के उपरांत उनकी मृत देह को शैक्षणिक अध्ययन के लिए मेडिकल कॉलेज मनेन्द्रगढ़ के विद्यार्थियों के उपयोग में लाया जाएगा। इसके साथ ही, यदि चिकित्सकीय दृष्टि से उनका कोई अंग प्रत्यारोपण योग्य पाया जाता है, तो उसे किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए उपयोग करने की भी पूर्ण सहमति दी गई है।

मानवता और आने वाली पीढ़ी के हित में समर्पण

​रामाशंकर गुप्ता ने अपने इस फैसले पर बात करते हुए कहा कि देहदान उनके लिए महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के हित में किया गया समर्पण है। उनका मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर का उपयोग चिकित्सा शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ी की तार्किक सोच के विकास जैसे पवित्र उद्देश्यों के लिए होना चाहिए।

सेवा और मानवता की कोई उम्र नहीं होती

​आमतौर पर मृत्यु के बाद पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है, लेकिन समाजसेवी रामाशंकर गुप्ता ने यह संदेश दिया है कि जीवन की सार्थकता सिर्फ अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि जाने के बाद भी किसी के काम आने में है। 75 वर्ष की आयु में लिया गया यह दृढ़ संकल्प यह साबित करता है कि सेवा और परोपकार की कोई उम्र सीमा नहीं होती। उनका यह कदम समाज में देहदान और अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने में एक मील का पत्थर साबित होगा। 

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