नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में बीजेपी नेता समेत तीन लोगों को कार में जिंदा जलाकर मार डालने की जघन्य वारदात ने अब प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा अभूतपूर्व और आत्मघाती मोड़ ले लिया है, जिसने सत्ताधारी दल को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। यह मामला अब सिर्फ एक कानून-व्यवस्था की कानूनन लड़ाई नहीं रहा, बल्कि ‘बीजेपी बनाम बीजेपी’ का एक खौफनाक और खूनी जंग बन चुका है। चौंकाने वाला सच यह है कि इस तिहरे हत्याकांड में मरने वाले भी बीजेपी के नेता हैं और जिन पर हत्या की साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं, वे भी भाजपा और भाजयुमो के ही रसूखदार चेहरे हैं।
इस ‘इंसाइडर’ क्राइम ने पूरी सरकार और संगठन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘बुआ-भतीजे’ के रिश्ते ने इस आग में घी का काम किया है।
‘बुआ-भतीजे’ का वह सोशल मीडिया रिश्ता, जिसने उड़ाई संगठन की नींद

इस हत्याकांड के बाद सोशल मीडिया पर जो दस्तावेज और स्क्रीनशॉट तैर रहे हैं, उन्होंने स्थानीय स्तर पर चल रहे रसूख और सत्ता के खेल को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। इसमें भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व जिला कार्यसमिति सदस्य निशांत त्रिपाठी और आरोपियों के रसूख की कड़ियां सीधे शीर्ष नेतृत्व से जुड़ रही हैं।
2 मई की वो फेसबुक पोस्ट बनी गले की फांस:
पिछले ही महीने 2 मई को पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और वर्तमान भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से निशांत त्रिपाठी को अपना ‘करीबी कार्यकर्ता’ बताते हुए जन्मदिन की सार्वजनिक बधाई दी थी।
इसके जवाब में निशांत त्रिपाठी ने विधायक रेणुका सिंह को ‘बुआ जी’ कहकर संबोधित किया था और आभार जताया था। अब जब इस खूनी खेल में अपनों के ही नाम सामने आ रहे हैं, तो सोशल मीडिया पर ‘बुआ-भतीजे’ का यह रसूखदार संवाद पूरे प्रदेश में चर्चा और राजनीतिक थू-थू का विषय बन गया है। इसके अलावा, मामले से जुड़े मनोज त्रिपाठी की भी विधायक रेणुका सिंह के साथ कई खास तस्वीरें सामने आई हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के साथ भी ‘फ्रेम’ में कातिल

इस मामले में शामिल चेहरों की पहुंच सिर्फ स्थानीय स्तर तक ही सीमित नहीं थी। वायरल हो रही तस्वीरों में ये लोग वर्तमान केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के साथ भी बेहद रसूखदार अंदाज में खड़े नजर आ रहे हैं।
अब सबसे बड़ा राजनीतिक संकट यह खड़ा हो गया है कि एक तरफ जहां भाजपा अपने नेता की इस तरह हुई निर्मम हत्या पर शोक और आक्रोश जता रही है, वहीं दूसरी तरफ इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने या इसमें शामिल होने का आरोप खुद उनकी ही पार्टी के पदाधिकारियों और माननीयों के करीबियों पर लग रहा है। इस गहरे अंतर्विरोध ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का सबसे बड़ा हथियार दे दिया है।


कोरिया में ‘हाई अलर्ट’, रसूख के टकराव के बीच धारा 163 लागू
इस सनसनीखेज ‘अपनों के ही हाथों अपनों के कत्ल’ की खबर के बाद कोरिया जिले में भारी राजनीतिक तनाव और जनआक्रोश फैल गया है। दोनों ही पक्ष सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण मामला बेहद संवेदनशील हो चुका है। स्थिति को हाथ से बाहर निकलने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया है।
- कलेक्टर के आदेश पर पूरे क्षेत्र में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) कड़ाई से लागू है।
- किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शन, रैली, जुलूस या चक्काजाम पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
- चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल, वज्र वाहन और दंगा नियंत्रण बल तैनात हैं ताकि दो गुटों का टकराव रोका जा सके।
बड़ा राजनीतिक सवाल: जब मरने वाले भी अपने हों और मारने के पीछे भी अपनों का ही हाथ और रसूखदार नेताओं का वरदहस्त सामने आ रहा हो, तो क्या छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार और स्थानीय पुलिस बिना किसी राजनीतिक दबाव के इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगी? क्या ‘बुआ’ के रसूख और केंद्रीय मंत्रियों के साथ वाले ‘फ्रेम’ के आगे कानून बौना साबित होगा या पुलिस इस आत्मघाती राजनीतिक गठजोड़ को तोड़कर इंसाफ करेगी? पूरे प्रदेश की निगाहें इस वक्त कोरिया पर टिकी हैं।
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