न्यायालय नजूल तहसीलदार के कड़े आदेश के बाद हड़कंप, खसरा नंबर 193 की 756 वर्गफिट नदी मद की जमीन से सामान हटाने का अंतिम नोटिस, संयुक्त टीम ने दी सख्त चेतावनी
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़ । जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 11 में शासकीय नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए एक निर्माण पर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। हंसिया नदी के किनारे नजूल (शासकीय) भूमि पर अवैध रूप से खड़े किए गए एक आलीशान तीन मंजिला भवन को खाली करने के लिए संयुक्त प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है। न्यायालय नजूल तहसीलदार मनेन्द्रगढ़ द्वारा पारित कड़े आदेश के बाद हुई इस त्वरित कार्रवाई के तहत कब्जाधारी को तुरंत अपना सामान खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आगे की वैधानिक जब्ती व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इस बड़ी प्रशासनिक हलचल से क्षेत्र के भू-माफियाओं और अवैध अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है।
मौके पर जमी संयुक्त टीम; भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दी गई सख्त हिदायत
इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए राजस्व विभाग, नगरपालिका परिषद और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भारी पुलिस बल के साथ मनेन्द्रगढ़ के वार्ड नंबर 11 स्थित बस स्टैंड के समीप शंकर मंदिर के नीचे पहुंची。 कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विरोध से निपटने के लिए पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि तय समय-सीमा के भीतर यदि तीन मंजिला भवन से सामान खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन बलपूर्वक भवन को अपने कब्जे में लेकर आगे की सख्त दंडात्मक व वैधानिक कार्रवाई शुरू कर देगा।
न्यायालयीन आदेश और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट से खुला खेल
इस पूरे मामले की जड़ें नजूल तहसीलदार न्यायालय (रा.प्र.क्र. / 202501330500098 / ब-121 / 24-25) में चल रहे एक पुराने भूमि विवाद से जुड़ी हैं। दरअसल, आवेदक दशरथ प्रसाद सोनी (आत्मज स्व. रामाधार सोनी) ने न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर शिकायत की थी कि नगर मनेन्द्रगढ़ स्थित बस स्टैंड के नीचे, शंकर मंदिर के सामने शासकीय नजूल भूमि पर उनका मकान वर्ष 1985 से बना हुआ था। परंतु नदी में आई बाढ़ का अनुचित लाभ उठाकर अनावेदक दिवाकर मिश्रा (आत्मज स्व. ब्रह्मा मिश्रा) द्वारा वहां जबरन कब्जा कर अवैध निर्माण कार्य कराया जा रहा था, जिस पर तत्काल रोक लगाई जाए।
न्यायालय के निर्देश पर राजस्व निरीक्षक मनेन्द्रगढ़ (शहरी) द्वारा मौके की सघन जांच कर प्रतिवेदन सौंपा गया। 02 जनवरी 2025 को सौंपी गई इस आधिकारिक जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम मनेन्द्रगढ़ स्थित शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 193 के अंशभाग, जिसका कुल रकबा 756 वर्गफिट (मद भू-जल / हंसिया नदी) है, उस पर अनावेदक दिवाकर मिश्रा द्वारा बाउंड्रीवॉल, रैम्प, सीढ़ी और तीन मंजिला मकान बनाकर पूरी तरह से अवैध अतिक्रमण किया गया है। पंचनामे से यह भी साफ हुआ कि उक्त भूमि पांच साला वर्ष 2024-25 में आधिकारिक रूप से ‘हंसिया नदी’ के नाम पर दर्ज है।
दस्तावेजी साक्ष्य और कानूनी कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
- अवैध निर्माण का स्थान: बस स्टैंड के नीचे, शंकर मंदिर के सामने, वार्ड नं 11, मनेन्द्रगढ़।
- शासकीय खसरा नंबर: खसरा क्रमांक 193 (अंशभाग), कुल रकबा 14\times54 = 756 वर्गफिट।
- शासकीय मद: पांच साला वर्ष 2024-25 के अनुसार यह भूमि ‘हंसिया नदी’ (भू-जल) के रूप में दर्ज है।
- उल्लंघन की धारा: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत अवैध अतिक्रमण की पुष्टि।
भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत अल्टीमेटम
न्यायालय नजूल तहसीलदार ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों, राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट और दोनों पक्षों के जवाबों का गहन अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि अनावेदक दिवाकर मिश्रा द्वारा शासकीय नदी मद की भूमि पर किया गया निर्माण पूरी तरह से अवैध और नियम विरुद्ध है। यह कृत्य छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत दंडनीय और गंभीर श्रेणी का अतिक्रमण है।
इसी आदेश के परिपालन में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतिम चेतावनी दी है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि शासकीय जमीनों और जल स्रोतों (नदियों-नालों) पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामान खाली करने की दी गई मोहलत खत्म होते ही प्रशासन इस तीन मंजिला इमारत पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लेगा।
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