गीदम की गलियों से शुरू हुआ सफर अब नारायणपुर के कलेक्टोरेट तक, बस्तर की पहली महिला IAS के कंधों पर अब ‘अबूझमाड़’ की जिम्मेदारी
रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है नम्रता जैन। यह सिर्फ एक ट्रांसफर की खबर नहीं है, बल्कि एक ‘संकल्प’ के पूर्ण होने की कहानी है। बस्तर के गीदम की रहने वाली नम्रता जैन को नारायणपुर का नया कलेक्टर बनाया गया है। प्रशासन के इस फैसले ने न केवल बस्तरवासियों का दिल जीत लिया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि अपनी माटी का दर्द समझने वाली बेटी ही अब वहां बदलाव की नई इबारत लिखेगी।
वो एक ‘धमाका’ जिसने बदल दी जिंदगी की राह
नम्रता जैन का IAS बनने का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। गीदम में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपने घर के ठीक सामने एक स्कूल को नक्सलियों द्वारा बारूद से उड़ाते हुए देखा था। उस धमाके की गूँज ने नम्रता के मन में डर नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने का ‘जुनून’ पैदा किया। उन्होंने उसी दिन तय कर लिया था कि वे जिला प्रशासन का हिस्सा बनेंगी ताकि किसी और बच्चे का स्कूल न उजड़े।

आईपीएस पति निखिल राखेचा और अपने माता पिता के साथ आईएएस नम्रता जैन
IPS की वर्दी छोड़ी, क्योंकि जिद तो ‘कलेक्टर’ बनने की थी
नम्रता की कामयाबी की कहानी उनकी ‘जिद’ की भी कहानी है। UPSC में पहली बार उनका चयन IPS के लिए हुआ, लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट था। उन्होंने फिर से मेहनत की और 2018 में देशभर में 12वां स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया। वे बस्तर संभाग की पहली महिला आईएएस बनीं।
बस्तर का ‘पावर कपल’: एक तरफ विकास की कमान, दूसरी तरफ सुरक्षा का पहरा
दिलचस्प बात यह है कि नम्रता जैन जहां प्रशासनिक मोर्चे पर तैनात हैं, वहीं उनके पति निखिल राखेचा (IPS) पुलिसिंग के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहे हैं। निखिल वर्तमान में गरियाबंद के एसपी हैं और नक्सलियों के सफाए में उनकी अहम भूमिका रही है। अब नम्रता के रूप में नारायणपुर को एक ऐसी कलेक्टर मिली हैं जो अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति से बखूबी वाकिफ हैं।

रायपुर में विदाई समारोह के दौरान रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह के साथ आईईएस नम्रता जैन
विदाई में छलका बस्तर के प्रति प्रेम: “मैं सौभाग्यशाली हूँ”
हाल ही में रायपुर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में नम्रता जैन काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी पर कहा:
“एक अधिकारी के तौर पर आप कहीं भी सेवा दे सकते हैं, लेकिन बस्तर में काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं उसी मिट्टी में पली-बढ़ी हूँ। नारायणपुर और अबूझमाड़ की चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन वहां के लोगों का विश्वास जीतना और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना मेरा पहला लक्ष्य होगा। मैं अपनी माटी की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हूँ।”
क्यों खास है नम्रता की यह नई पारी ?
- स्थानीय जुड़ाव: बस्तर की बेटी होने के कारण भाषा और संस्कृति की गहरी समझ।
- अनुभव: सुकमा जिला पंचायत सीईओ के तौर पर पहले ही ग्राउंड जीरो पर काम कर चुकी हैं।
- चुनौती: नारायणपुर का ‘अबूझमाड़’ इलाका, जहां आज भी विकास की किरण पहुंचाना बड़ी चुनौती है।
- प्रेरणा: बस्तर की हजारों बेटियों के लिए नम्रता एक रोल मॉडल हैं।
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