कांग्रेस की दो टूक चेतावनी : दोषी कंपनी पर दर्ज हो FIR और मिले भारी मुआवजा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़ | ग्राम पंचायत परसगढ़ी तिराहे के पास आज उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब मेडिकल कॉलेज निर्माण कार्य में लगी ‘डी वी प्रोजेक्ट’ कंपनी के एक अनियंत्रित पानी टैंकर ने बाइक सवार युवक को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस रूह कँपा देने वाले हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश है। घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस पार्टी ने हमलावर रुख अख्तियार कर लिया है और प्रशासन को आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी है।


गुलाब कमरों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
घटना के तुरंत बाद भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरों के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल थाने पहुँचा। उन्होंने थाना प्रभारी से सीधे शब्दों में कहा कि यह महज एक ‘हादसा’ नहीं बल्कि कंपनी की लापरवाही से की गई ‘हत्या’ है।
निर्माण कार्य में लगी कंपनियां नियमों को ठेंगे पर रख रही हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। अगर कंपनी प्रबंधन और दोषी ड्राइवर पर तत्काल FIR नहीं हुई, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक ईंट से ईंट बजा देगी।
— गुलाब कमरों, पूर्व विधायक
कांग्रेस की प्रमुख मांगें:
- FIR दर्ज हो: डी वी प्रोजेक्ट के मालिक, प्रबंधन और लापरवाह चालक पर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
- सम्मानजनक मुआवजा: मृतक के परिजनों को तत्काल उचित आर्थिक सहायता और सम्मानजनक मुआवजा राशि प्रदान की जाए।
- वाहनों पर नकेल: निर्माण कार्य में लगे भारी वाहनों की गति और फिटनेस की सख्त निगरानी हो ताकि भविष्य में कोई और मां अपनी संतान न खोए।
प्रशासनिक फेल्योर पर बरसे रमेश सिंह
मनेंद्रगढ़ विधानसभा कांग्रेस प्रत्याशी रहे रमेश सिंह ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इलाके में भारी वाहनों की बेतरतीब आवाजाही से आमजन में भय का माहौल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मृतक परिवार को तुरंत न्याय नहीं मिला, तो कांग्रेस पार्टी तहसील और थाने का घेराव करने से पीछे नहीं हटेगी।
इनकी रही मौजूदगी
न्याय की इस मांग को बुलंद करने के लिए मौके पर जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी तिवारी, महामंत्री रफीक मेमन, शहर अध्यक्ष सौरव मिश्रा और ग्रामीण अध्यक्ष रामनरेश पटेल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



कांग्रेस ने अब गेंद प्रशासन के पाले में डाल दी है। अल्टीमेटम साफ है—या तो कार्रवाई और मुआवजा, या फिर उग्र जनआंदोलन और घेराव। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘खूनी लापरवाही’ पर क्या कदम उठाता है।




