राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा ने योग को जीवनशैली बनाने की अपील की, योग के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले साधक पुरस्कृत
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। मन-मस्तिष्क के विकार और शारीरिक कमजोरी को दूर करने की सबसे सशक्त माध्यम ‘योग’ है, और यह योग ही है जो अयोग्य को भी योग्य बनाने की क्षमता रखता है। यह उद्गार राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने रायपुर में आयोजित योगासन कला प्रदर्शन एवं सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। परम जीवनम् फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. शर्मा ने फिल्मी अंदाज़ में “सभी विकारों और लाख दुखों की एक दवा—योग, काहे घबराए” का संदेश देते हुए, योग को जीवनशैली में शामिल करने का सशक्त आह्वान किया।

योग हमें वृद्ध नहीं होने देता
डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में योग के आध्यात्मिक और शारीरिक लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने भीतर के ‘बालमन’ को हमेशा बनाए रखना चाहिए, क्योंकि बालमन स्वच्छ, पवित्र और ऊर्जावान होता है, और यही योग का वास्तविक स्वरूप है।
- स्वास्थ्य का आधार: उन्होंने स्पष्ट किया कि योग एक ऐसा माध्यम है जो न सिर्फ शारीरिक कमजोरी बल्कि मन-मस्तिष्क के विकारों को भी दूर करता है।
- बालमन की शक्ति: डॉ. शर्मा ने कहा कि बच्चे स्वभाव से ही योग के सबसे सुंदर प्रतिरूप होते हैं। नियमित योग से उनका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास अधिक सक्षम बनता है।
- अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा से दूरी: उन्होंने अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को नीचे की ओर ले जाने वाला बताते हुए योग द्वारा आंतरिक शांति प्राप्त करने पर ज़ोर दिया।
7 से 77 तक योगसाधकों का सम्मान
डॉ. शर्मा को यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई कि परम जीवनम् योग केंद्र में 7 वर्ष के बच्चों से लेकर 77 वर्ष के बुजुर्ग तक, सभी नियमित रूप से योग का अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने योगसाधकों की निरंतरता और जीवंतता की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में, योग के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले छह योगसाधकों—मीणा बघेल, अजय साहू, अशोक सेठ, अनीता, ज्योति साहू और राधा को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. मनीषा सिंह (प्रोफेसर, AIIMS), महेश तिवारी (प्राचार्य, आत्मानंद स्कूल) और योगाचार्य चूड़ामणि नायक भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।







