विधायक संगीता सिन्हा के सामने छलका मासूमों और ग्रामीणों का दर्द, जनदर्शन से लेकर DEO तक शिकायतें बेअसर
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बालोद। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के दावों की हवा निकालती एक कड़वी सच्चाई बालोद ब्लॉक के ग्राम धौराभाठा से सामने आई है। यहाँ के प्राथमिक शाला में बच्चों का भविष्य एक ही कमरे के भीतर सिमट कर रह गया है। स्थिति यह है कि एक ही कक्षा में पहली से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई कराई जा रही है।
हाल ही में संजारी बालोद विधानसभा की विधायक और महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष संगीता सिन्हा जब धौराभाठा स्थित स्कूल पहुँचीं, तो वहाँ का नजारा देखकर वे भी स्तब्ध रह गईं।
“दीदी! एक ही कमरे में बैठते हैं सब…” मासूमों ने बयां किया दर्द
निरीक्षण के दौरान जब विधायक संगीता सिन्हा ने बच्चों से आत्मीय बातचीत की और उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा, तो बच्चों ने मासूमियत और मायूसी के साथ अपनी समस्या बताई। बच्चों ने बताया कि पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के छात्र एक ही कमरे में बैठते हैं, जबकि चौथी और पांचवीं के बच्चों को बरामदे या उसी कमरे के कोने में जगह मिलती है। शोर-शराबे और जगह की कमी के बीच बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।
2022 से गुहार, फिर भी ‘सिस्टम’ बेखबर
विधायक से बातचीत के दौरान ग्रामीणों का आक्रोश और निराशा भी खुलकर सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि:
- वे इस गंभीर समस्या को लेकर जनदर्शन और जिला शिक्षा अधिकारी से कई बार गुहार लगा चुके हैं।
- नया भवन स्वीकृति के आश्वासन 2022 से दिए जा रहे हैं, लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- अधिकारियों के ढुलमुल रवैये के कारण गाँव के कई लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजने को मजबूर हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग की लापरवाही पर विधायक सख्त, संज्ञान लेने की मांग
इस पूरी स्थिति का जायजा लेने के बाद संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने शिक्षा विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने उच्च अधिकारियों और शिक्षा विभाग से इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेने और धौराभाठा में नए स्कूल भवन का निर्माण व आवश्यक व्यवस्थाएं जल्द से जल्द पूरी करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि विधायक के इस दौरे और मीडिया के संज्ञान के बाद सो रहा प्रशासन जागता है या इन मासूमों को आगे भी इसी तरह एक ही कमरे में भविष्य गढ़ने को मजबूर होना पड़ेगा।
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