पूर्व महापौर के. डोमरु रेड्डी ने सीएम पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अविलंब 35 स्वीकृत पदों के सेटअप की मांग
नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी। नए जिले के गठन की खुशी और जश्न के शोर में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की बुनियाद यानी ‘शिक्षा व्यवस्था’ पूरी तरह से हासिये पर ढकेल दी गई है। जिला बने तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग को आज तक आवश्यक प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों का स्थायी सेटअप ही नसीब नहीं हुआ। इस प्रशासनिक उपेक्षा का सीधा और दर्दनाक खमियाजा जिले के मासूम नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है। यही वजह है कि राज्य की बोर्ड परीक्षा परिणाम सूची में लगातार बीते तीन वर्षों से यह जिला सबसे निचले और अंतिम पायदान पर रेंग रहा है।
इस गंभीर और चिंताजनक स्थिति पर चिरमिरी नगर निगम के पूर्व महापौर एवं जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष के. डोमरु रेड्डी ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीएम पोर्टल (1076) में मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से शिक्षा विभाग के लिए आवश्यक पदों के सेटअप को तत्काल स्वीकृत करने की पुरजोर मांग की है।
बिना सेनापति और रणनीति के चल रहा जिला शिक्षा विभाग
पूर्व महापौर के. डोमरु रेड्डी ने जारी बयान में बताया कि MCB जिला केवल प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के भरोसे घसीटा जा रहा है। प्रशासनिक दृष्टि से सुचारू संचालन के लिए जिन 35 महत्वपूर्ण पदों की आवश्यकता है, राज्य सरकार द्वारा उनका सेटअप ही मंजूर नहीं किया गया है।
वर्तमान में जिले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण पद रिक्त/अस्वीकृत पड़े हैं:
- प्रशासनिक अधिकारी: जिला शिक्षा अधिकारी (1), सांख्यिकी अधिकारी (1), सहायक संचालक (3), सहायक परियोजना अधिकारी (5)।
- तकनीकी व प्रबंधन पद: सर्व शिक्षा डीएमसी (1), एमआईएस प्रशासक (1), एडीपीओ (1), डेटा ऑपरेटर (1)।
- लेखा व लिपिकीय वर्ग: लेखापाल (2 पद), सहायक ग्रेड-1 (2 पद), सहायक ग्रेड-2 (7 पद), सहायक ग्रेड-3 (6 पद)।
‘चहेतों को उपकृत करने का खेल, कक्षाओं से दूर हुए शिक्षक’
के. डोमरु रेड्डी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थायी सेटअप न होने का फायदा उठाकर प्रशासनिक स्तर पर ‘पसंद-नापसंद’ का खेल खेला जा रहा है। बिना अनुभव और बिना तय जवाबदेही के अपने चहेते लोगों को अस्थाई तौर पर इन प्रशासनिक पदों पर बैठा दिया गया है।
इसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह हुआ कि मूल रूप से अध्यापन कार्य के लिए नियुक्त शिक्षक विद्यालयों की कक्षाओं से दूर होकर दफ्तरों की कुर्सियों पर बैठ गए। जब स्कूलों में पढ़ाने वाले ही नहीं होंगे और प्रशासनिक तंत्र गैर-अनुभवी हाथों में होगा, तो परीक्षा परिणाम का अंतिम पायदान पर आना स्वाभाविक है।
जिम्मेदार कौन: शिक्षक या शासन ?
रेड्डी ने सवाल उठाया कि लगातार तीन वर्षों से आ रहे निराशाजनक परिणामों का जिम्मेदार आखिरकार कौन है? क्या इसके लिए विद्यार्थी जिम्मेदार हैं, शिक्षक या फिर तंत्र को पंगु बनाकर रखने वाली सरकार?
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक राज्य सरकार अविलंब 35 पदों का आधिकारिक सेटअप स्वीकृत कर स्थायी पदस्थापना नहीं करती, तब तक जिले की शैक्षणिक स्थिति में सुधार असंभव है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राजनीतिक श्रेय लेने से आगे बढ़कर जिले के बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए त्वरित कड़े कदम उठाए जाएं।
About The Author













