108 एम्बुलेंस अस्पताल गेट पर धधकी, गर्भवती महिला सुरक्षित पहुँची वार्ड, कुछ ही देर बाद जुड़वां बच्चों को दिया जन्म
नई पहल न्यूज नेटवर्क। जगदलपुर। कभी-कभी जिंदगी मौत से जीतकर लौटती है… और तब उसकी किलकारियाँ पूरे माहौल को भिगो देती हैं। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के गेट पर ऐसा ही नज़ारा था। गर्भवती महिला को लेकर आ रही 108 एम्बुलेंस अचानक आग की लपटों में घिर गई। पलभर को लगा मानो ज़िंदगी अब राख हो जाएगी। लेकिन ड्राइवर और स्टाफ की सूझबूझ ने चमत्कार कर दिखाया। महिला को सुरक्षित वार्ड पहुँचाया गया और कुछ ही देर बाद उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। मौत के धुएँ से निकलकर ज़िंदगी की किलकारियाँ गूंज उठीं।
जब धधकने लगी एम्बुलेंस…
अस्पताल गेट से ठीक 100 मीटर पहले एम्बुलेंस से धुआँ निकलना शुरू हुआ और कुछ ही सेकंड में आग की लपटें उठीं। अंदर दर्द से तड़पती महिला की साँसें तेज हो गईं। बाहर हर किसी की धड़कनें थम सी गईं। लेकिन ड्राइवर ने हिम्मत दिखाई, वाहन रोका और साथी के साथ मिलकर महिला को आग से दूर सुरक्षित बाहर निकाला।

बारिश, आग और इंसानियत की जंग
तेज बारिश हो रही थी, आग भड़क रही थी और अस्पताल का हर कर्मचारी जान हथेली पर रखकर आग बुझाने में जुटा था। किसी ने फायर पाइप थामा, किसी ने सिलेंडर उठाया, किसी ने सुरक्षा घेरा संभाला। यह सिर्फ आग बुझाने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि एक माँ और उसके अजन्मे बच्चों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद थी।
और फिर गूंज उठीं किलकारियाँ…
वार्ड में पहुँचते ही महिला ने पहले एक बच्ची और फिर एक बेटे को जन्म दिया। पूरे अस्पताल में यह खबर फैलते ही राहत और खुशी की लहर दौड़ गई। जो लोग कुछ देर पहले आग के धुएँ में जिंदगी को बुझते देख रहे थे, उनकी आँखें अब मासूम किलकारियों से भर आईं। इस घटना ने इंसानियत और किस्मत की जीत तो दिखाई, लेकिन साथ ही कई कड़वे सवाल छोड़ दिए। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने टीम की सराहना करते हुए कहा, यह हमारे स्टाफ की मेहनत और तत्परता थी, जिसने तीन जिंदगियाँ बचाईं।
अस्पताल के गेट पर मौत खड़ी थी, लेकिन हिम्मत और इंसानियत ने उसका दरवाज़ा बंद कर दिया। आज जब अस्पताल में जुड़वां बच्चों की किलकारियाँ गूंज रही हैं, तो यह सिर्फ एक माँ की जीत नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा सबक है –
जाको राखे साइयां, मार सके न कोय…
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