गृहमंत्री विजय शर्मा और सिस्टम की नाकामी पर उठे सवाल, छह साल में 177 पुलिसकर्मी कर चुके हैं आत्महत्या
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बालोद। जिले से बड़ी खबर सामने आई है। दल्लीराजहरा थाना परिसर में पदस्थ एएसआई हीरामन मंडावी ने शनिवार सुबह थाने के पुलिस बैरक में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सहकर्मी पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मामले की पुष्टि करते हुए सिटी एसपी चित्रा वर्मा ने बताया कि आत्महत्या के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

लगातार बढ़ रहे आत्महत्या के मामले
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े छह वर्षों में छत्तीसगढ़ में 177 सुरक्षा कर्मियों ने आत्महत्या की है। इनमें राज्य पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल हैं। आत्महत्या की वजहों में पारिवारिक तनाव, व्यक्तिगत समस्याएँ, नशे की लत और बीमारियाँ प्रमुख रूप से सामने आई हैं।
सिर्फ अगस्त माह की बात करें तो,
3 अगस्त को कोंडागांव में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के एक जवान ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली थी।
6 अगस्त को दुर्ग जिले में एक पुलिसकर्मी ने अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर जान दे दी।
भाजपा पार्षद ने अपनी ही सरकार को घेरा
इस घटना पर भाजपा पार्षद विशाल मोटवानी ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा “यह प्रदेश की भाजपा सरकार और गृहमंत्री विजय शर्मा की सीधी नाकामी है। पुलिसकर्मी डिप्रेशन में जाकर आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, यह सिस्टम की गंभीर विफलता है। उन्होंने मांग की कि आत्महत्या की घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच हो और पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं।
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल
आखिर थाने के भीतर ही पुलिसकर्मी आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?
क्या ड्यूटी के तनाव और दबाव को कम करने के लिए कोई काउंसलिंग या हेल्पलाइन मौजूद है?
177 पुलिसकर्मियों की आत्महत्या के बाद भी सरकार ने क्या कदम उठाए?
गृहमंत्री विजय शर्मा और सरकार इस घटना की जिम्मेदारी कब लेंगे?
यह खबर न सिर्फ एक पुलिसकर्मी की दर्दनाक मौत की कहानी है, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस सिस्टम और सरकार की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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