
मेरी मां अक्सर कहा करती हैं – “आप सबसे लड़ सकते हैं, पर अपने नसीब से नहीं।”
पहले उनका यह कहना मुझे बहुत अखरता था। लगता था जैसे मां मायूस होकर ऐसा कहती हैं। लेकिन वक्त के साथ समझ आने लगा कि मां ऐसा क्यों कहती थीं।
जब हम किसी मुश्किल दौर से गुजर रहे होते हैं, तो अक्सर दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं। लगता है सामने वाला कितना खुश है, उसके पास सब कुछ है, उसके जीवन में कष्ट क्यों नहीं? उसे इतनी आसानी से सब कुछ कैसे मिल गया? वह तो मुझसे बेहतर नहीं, फिर भी उसके पास इतना कुछ क्यों है?
ऐसे सवाल आपके मन में भी आते होंगे। और यह स्वाभाविक भी है।
लेकिन क्या आपने कभी उन संघर्षों से निकलने के बाद खुद को टटोला है? अतीत में झांक कर देखा है कि तब आप कैसे थे और अब कैसे हैं? यकीनन आपको भी एहसास हुआ होगा कि आप पहले से ज्यादा समझदार, सहनशील और मजबूत हो चुके हैं।
दरअसल, हमारे सामने हालात जैसे भी आएं, हमें उनसे लड़ना ही पड़ता है। फर्क सिर्फ इतना है कि हमें थोड़ा सब्र और हिम्मत चाहिए। अगर हमने अपने कमजोर पलों में जिंदगी से हार नहीं मानी, तो न सिर्फ जीवन जीना सीख जाते हैं बल्कि यह भी समझ लेते हैं कि जिसने हमें यह जीवन दिया है, उसने हमारे लिए पहले से ही बहुत कुछ तय कर रखा है।
इसलिए खुद को कभी हारने मत दीजिए। संघर्ष से घबराइए मत, क्योंकि यही संघर्ष आपको और मजबूत बनाते हैं। अपनी फाइटर स्पिरिट को जिंदा रखिए और बाकी भरोसा ऊपर वाले पर छोड़ दीजिए।

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