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संगठन की बेरुखी ने तोड़ा भाजपा नेता का हौसला : भाजपा सरकार में भाजपा नेता ने ही मुख्यमंत्री से मांगी इच्छामृत्यु

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हादसे में जिंदगीभर के लिए अपाहिज हुए पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव, दो साल से बिस्तर पर तड़पते रहे

इलाज में लुटा चुके 35 लाख, भाजपा सरकार और संगठन से उपेक्षित होकर मुख्यमंत्री से इच्छामृत्यु की मांग

नई पहल न्यूज नेटवर्क। सूरजपुर। दो साल पहले जो शख्स भाजपा के जुझारू मंडल महामंत्री के रूप में कार्यकर्ताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में शामिल होने जा रहा था, आज वही नेता बिस्तर पर असहाय पड़ा मौत की दुआ मांग रहा है। भाजपा के पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव ने अपनी टूटी हुई जिंदगी और संगठन की बेरुखी से आहत होकर मुख्यमंत्री को पत्र लिख इच्छामृत्यु की मांग की है।

हादसे ने छीन ली जिंदगी की रोशनी

वह दिन विशंभर यादव कभी भूल नहीं सकते – जब अपने कार्यकर्ताओं से भरी बस को लेकर रायपुर जा रहे थे और बेमेतरा के पास बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भीषण हादसे ने उन्हें हमेशा के लिए अपाहिज बना दिया। संगठन का भरोसा, साथियों का जोश और जनता की सेवा का सपना – सबकुछ एक ही पल में चकनाचूर हो गया।

पार्टी के लिए सबकुछ दिया, अब पार्टी ने ही भुला दिया

घायल होने के बाद तत्कालीन बड़े नेताओं और प्रधानमंत्री ने सहानुभूति जरूर जताई। एयर एंबुलेंस से दिल्ली तक इलाज की व्यवस्था भी हुई। लेकिन उसके बाद सब जैसे भूल गए।
आज जब छत्तीसगढ़ में भाजपा की ही सरकार है, तब भी उनका कोई हाल-चाल लेने नहीं आता।

विशंभर यादव की पीड़ा उनके शब्दों में साफ झलकती है –
मैं अब जीते-जी मर चुका हूं। जिस पार्टी को अपना जीवन दे दिया, उसी ने मुझे भुला दिया। परिवार भी मेरे कारण टूट चुका है। अब मौत ही मेरी मुक्ति है।

परिवार भी टूटा, हिम्मत भी टूटी

उनकी पत्नी की आंखें भर आती हैं जब वह कहती हैं –
“हमने भाजपा को अपना सबकुछ दिया। मेरे पति ने हमेशा पार्टी को परिवार से ऊपर रखा। लेकिन आज हम पूरी तरह अकेले हैं। इलाज में जो भी था सब खर्च हो गया, घर भी कर्ज़ में डूब गया। अब हम कहां जाएं ? अब तक 30 से 35 लाख रुपए इलाज में खर्च हो चुके हैं। परिवार के पास और कुछ नहीं बचा। विशंभर यादव बिस्तर पर लाचार पड़े हैं और पत्नी असहाय खड़ी, बस गुहार लगा रही हैं कि संगठन उनके पति का इलाज करवा दे।

बड़ा सवाल : कार्यकर्ता सर्वोपरि या फिर भुला दिया गया नाम ?

भाजपा हमेशा कार्यकर्ताओं को अपनी ताकत बताती रही है। लेकिन यही पार्टी का एक समर्पित नेता आज अपनी उपेक्षा से टूटकर इच्छामृत्यु की मांग कर रहा है।
क्या यही कार्यकर्ताओं का सम्मान है? क्या यही भाजपा का कार्यकर्ता-प्रेम है?

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