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अनुकंपा नियुक्ति से मिली पुलिस की नौकरी गंवाई : नव आरक्षक अमित कुमार बर्खास्त

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प्रशिक्षण छोड़ 269 दिन तक गायब, आपराधिक गतिविधियों में फंसा, SP कोरिया ने दिखाई कड़ी कार्रवाई

नई पहल न्यूज नेटवर्क। कोरिया। पुलिस सेवा में आने से पहले ही लापरवाही और अपराध का रास्ता चुनने वाले नव आरक्षक अमित कुमार को विभाग ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। अनुकंपा नियुक्ति से मिली नौकरी को उन्होंने गैरहाजिरी और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहकर दांव पर लगा दिया। आखिरकार पुलिस अधीक्षक कोरिया रवि कुमार कुर्रे (भा.पु.से.) ने 17 सितंबर 2025 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला कोरिया से मिली जानकारी के अनुसार, नव आरक्षक (जीडी) अमित कुमार, पिता स्व. आरक्षक रामेश्वर राम को दिनांक 30 अप्रैल 2024 को अनुकंपा नियुक्ति पर नौकरी दी गई थी। उन्हें 4 नवंबर 2024 से पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय, माना (रायपुर) के 75वें सत्र में बुनियादी प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। हालांकि, प्रशिक्षण शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद, 23 दिसंबर 2024 से अमित कुमार बिना किसी सूचना के लापता हो गए। पुलिस विभाग ने कई बार नोटिस जारी कर उन्हें वापस बुलाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने न तो प्रशिक्षण में हाजिरी दी और न ही अनुपस्थिति का कोई संतोषजनक जवाब दिया। करीब 269 दिन तक गैरहाजिर रहने के साथ-साथ उनके खिलाफ थाना उदयपुर, जिला सरगुजा में अपराध क्रमांक 87/2025 (धारा 296, 351, 115 बीएनएस) दर्ज पाया गया, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसके अलावा, उन पर पूर्व में भी अपराध क्रमांक 73/2022 दर्ज हो चुका था, जिसमें वे न्यायालय से दोषमुक्त हुए थे।

जांच और कार्रवाई

प्रारंभिक जांच उप पुलिस अधीक्षक राजेश साहू द्वारा की गई। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि प्रशिक्षण काल में ही अमित कुमार गांव में रहकर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहे। यह आचरण पुलिस सेवा के मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। छत्तीसगढ़ पुलिस मैनुअल और नियुक्ति शर्तों के अनुसार, यदि परिवीक्षाधीन अवधि में किसी अधिकारी का आचरण असंतोषजनक पाया जाता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इसी प्रावधान के तहत पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे ने अमित कुमार की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया।साथ ही उनकी अनुपस्थिति की कुल अवधि “काम नहीं, वेतन नहीं” के आधार पर निराकृत की गई।

संदेश स्पष्ट

यह बर्खास्तगी विभागीय अनुशासन और जिम्मेदारी की कसौटी पर खरे न उतरने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है कि पुलिस सेवा में सिर्फ नौकरी पाना ही नहीं, बल्कि ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा सबसे अहम है।

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