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एक्सक्लूसिव : मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट में दो ‘घर-बदले’ विधायक और एक संघी निष्ठावान – तीन नामों पर टिकी नजरें

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मंत्रिमंडल विस्तार से पहले तीन चेहरों पर सबसे ज्यादा चर्चा अंबिकापुर और आरंग से पूर्व कांग्रेसी विधायक, दुर्ग से संगठननिष्ठ गजेंद्र यादव, साय सरकार के समीकरण में नए संकेत

रविकांत सिंह राजपूत। नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कल होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार से पहले तीन विधायकों के नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से 2 चेहरे 2023 के विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले तक  कांग्रेस में सक्रिय थे। 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे हैं, जबकि तीसरा नाम संगठन निष्ठ और लंबे समय से संघ परिवार से जुड़ा हुआ माना जाता है।

अंबिकापुर से विधायक राजेश अग्रवाल

लखनपुर नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रहे है और प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के करीबी रहे अग्रवाल कांग्रेस के लिए सक्रिय रहे। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा का दामन थामकर सिंहदेव को ही मात दी। यह जीत राजनीतिक समीकरणों में बड़ा उलटफेर मानी गई।

आरंग से विधायक गुरु खुशवंत साहेब

प्रदेश के पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया के खासमखास रहे। डहरिया के मंत्री रहते हुए उन्हें अक्सर उनके बंगले में देखा जाता था। लेकिन चुनाव से ठीक तीन महीने पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का रुख किया और फिर भाजपा प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरकर डहरिया को पराजित किया।

दुर्ग से विधायक गजेंद्र यादव

खाटी संगठन निष्ठ छवि के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्व. मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा को चुनाव में हराकर सियासी पारी को नया मुकाम दिया। गजेंद्र यादव के पिता बिसराराम यादव संघ के प्रदेश प्रमुख रहे हैं, लिहाज़ा उनका जुड़ाव शुरू से ही भाजपा की मूल विचारधारा से माना जाता है।

ये तीनों नाम भाजपा की रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करते हैं

राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि ये तीनों नाम भाजपा की रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करते हैं। अंबिकापुर और आरंग से कांग्रेस छोड़कर आए विधायकों की जीत भाजपा की संगठनात्मक ताकत और मौके भुनाने की क्षमता को दर्शाती है, वहीं दुर्ग से गजेंद्र यादव का उभार संगठन की परंपरागत लाइन को आगे बढ़ाने जैसा है। अब मंत्रिमंडल विस्तार में कौन-सा चेहरा शपथ लेगा, यह कल ही तय होगा, लेकिन इतना साफ है कि इन तीन नामों के इर्द-गिर्द राजनीतिक चर्चा चरम पर है और साय सरकार के नए समीकरण इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस से भाजपा तक का सफर

राजेश अग्रवाल (अंबिकापुर)

लखनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय।

प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के करीबी।

2023 चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल होकर सिंहदेव को हराया।

गुरु खुशवंत (आरंग)

कांग्रेस के पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया के खास रहे।

अक्सर मंत्री डहरिया के साथ सियासी गतिविधियों में सक्रिय दिखते थे।

चुनाव पूर्व भाजपा का दामन थामा और डहरिया को मात देकर विधायक बने।

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