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25 साल बाद आज़ादी का जश्न : “लंच विद कलेक्टर”, संबित मिश्रा ने बच्चों को शिक्षा की राह दिखाई

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25 साल बाद आज़ादी का जश्न देख भावुक हुए नन्हें कदम “लंच विद कलेक्टर” में बच्चों ने रखी मन की बात, शिक्षा और सपनों को पंख देने का संकल्प, सेंट्रल लाइब्रेरी और एजुकेशन सिटी देखकर रोमांचित हुए पुनः खुले स्कूलों के बच्चे

नई पहल न्यूज नेटवर्क। बीजापुर। कभी माओवादी खौफ और बंदूक की दहशत में सिमटे बीजापुर के बच्चे अब नई सुबह देख रहे हैं। जिला प्रशासन की ऐतिहासिक पहल ने इन नन्हें जीवनों को शिक्षा और आज़ादी की असली तस्वीर से परिचित कराया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 11 गाँवों के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों ने जिला मुख्यालय आकर न केवल परेड देखी बल्कि कलेक्टर संबित मिश्रा (IAS) के साथ लंच कर अपने मन की बात भी साझा की।

बच्चों की भावनाओं को सुना, सपनों को दिशा दी

“लंच विद कलेक्टर” कार्यक्रम में बच्चों ने मासूमियत से अपने सपनों को साझा किया।

करका गाँव की लक्ष्मी और अनन्या ने पूछा – “डॉक्टर और मैडम बनने के लिए कितना पढ़ना होगा?”

कलेक्टर संबित मिश्रा ने मुस्कुराते हुए उन्हें समझाया कि प्राथमिक से हायर सेकेंडरी तक नियमित पढ़ाई कर नीट और बीएड जैसे पाठ्यक्रम को लक्ष्य बनाना होगा।

कोंडापल्ली और भट्टीगुड़ा के शाला त्यागी बच्चों से मुलाकात में उन्होंने कहा – “आपकी हिम्मत और लगन ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।”

इस दौरान बच्चों को न सिर्फ प्रोत्साहन मिला बल्कि उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की ठोस राह भी मिली।

25 साल बाद देखी आज़ादी की परेड

जिन इलाकों में अब तक तिरंगा फहराना मुश्किल था, वहीं से आए बच्चों ने पहली बार जिला मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस परेड देखी। मार्च पास्ट और आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर बच्चे लगातार तालियाँ बजाते रहे। यह दृश्य उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बन गया।

किताबों और ज्ञान की दुनिया से पहला परिचय

सेंट्रल लाइब्रेरी में विज्ञान के नवाचार देखकर बच्चों की आँखों में चमक आ गई।

एजुकेशन सिटी के बड़े-बड़े स्कूल देखकर वे रोमांचित हो उठे।

कई बच्चों ने पहली बार बस की सवारी का भी आनंद लिया।

प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति से खुले 16 स्कूल

जिला प्रशासन ने शांति, विकास और सुरक्षा अभियान के तहत वेंडे स्कूल दायकाल योजना में 20 साल से बंद पड़े 16 स्कूलों को फिर से शुरू कराया। एड्समेटा, करका, कोरचोली, तोड़का, सावनार, नेनड्रा, इतावर, भट्टीगुड़ा, कोंडापल्ली, अन्नाराम और कोतरापाल जैसे गांवों में बच्चों की पढ़ाई का नया अध्याय शुरू हुआ।

कलेक्टर संबित मिश्रा की सराहनीय पहल

कलेक्टर संबित मिश्रा (IAS) ने न सिर्फ बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाया बल्कि शिक्षादूतों को जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। उनका यह कदम बीजापुर के इतिहास में उम्मीद और बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।

प्रशासनिक अमले की उपस्थिति

इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत नम्रता चौबे, एडिशनल कलेक्टर भूपेंद्र अग्रवाल, एडीएम जागेश्वर कौशल, डिप्टी कलेक्टर नारायण प्रसाद गवेल, डीईओ लखन लाल धनेलिया, सहायक आयुक्त देवेंद्र सिंह, एपीसी जाकिर खान सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। इस पूरे आयोजन ने यह साबित किया कि शिक्षा और अवसर मिलने पर नक्सल प्रभावित अंचल के ये बच्चे भी भविष्य की नई इबारत लिख सकते हैं। कलेक्टर संबित मिश्रा की यह पहल निश्चित ही बीजापुर की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

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