हादसे ने तोड़ा शरीर, तंगहाली ने छीनी उम्मीदें… आज भूपेश बघेल की एक कॉल ने फिर से जगाई जीने की आस
नई पहल न्यूज नेटवर्क। सूरजपुर। कभी राजनीतिक गलियारों में सक्रिय रहने वाले भाजपा के पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव की जिंदगी आज तंगहाली और बीमारी की दर्दनाक मिसाल बन चुकी है। कुछ दिन पहले उन्होंने सरकार से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगकर सबको झकझोर दिया था। और आज, उनकी इस बेबसी के बीच, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फोन कर उन्हें सहारा दिया।

कांग्रेस नेता पंकज तिवारी के मोबाइल से हुई इस बातचीत में जब बघेल ने कहा—
“रायपुर आइए, आपके इलाज की व्यवस्था मैं करूंगा। अब आपको अकेले नहीं लड़ना होगा।”
तो विशंभर यादव और उनकी पत्नी की आंखें भर आईं। टूटी हुई जिंदगी में उम्मीद की नन्ही लौ फिर से जल उठी।
हादसे से टूटी खुशियां
विशंभर यादव की कहानी बेहद दर्दनाक है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में शामिल होने जाते वक्त सड़क हादसे के शिकार हुए थे। हादसे ने उनका शरीर बुरी तरह घायल कर दिया। लंबे इलाज के बाद भी वे पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए।
तंगहाली की मार
हादसे के बाद जिंदगी जैसे ठहर गई। दवाइयों और इलाज का बोझ इतना बढ़ा कि परिवार की जमा-पूंजी सब खत्म हो गई। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। इलाज अधूरा रह गया और शरीर दिन-ब-दिन कमजोर होता चला गया।
खुद विशंभर यादव ने एक बार कहा था—
“अब जीने की ताकत नहीं बची, बीमारी और तंगहाली ने सब छीन लिया।”
यही मजबूरी थी कि उन्होंने सरकार से इच्छा मृत्यु की मांग की।
आज की संवेदनशील पहल
आज जब भूपेश बघेल ने उनका हाल जाना और इलाज कराने का वादा किया, तो माहौल भावुक हो गया। यह सिर्फ एक फोन कॉल नहीं था, बल्कि जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे विशंभर यादव के लिए आस की नई सुबह थी।
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