श्याम बिहारी जायसवाल ने थामा गरीब परिवार का हाथ, कहा, बेटी का इलाज मेरी जिम्मेदारी है
सरकार का मानवीय चेहरा : संवेदनशील नेतृत्व से गरीब परिवारों में जगी उम्मीद की किरण

नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। बीजापुर जिले के भोपालपटनम ब्लॉक के वरदली गांव की 11 वर्षीय शांभवी गुरला की मासूम आंखों में एक ही सवाल था— “पापा, मैं ठीक हो जाऊंगी ना?”
पिता की चुप्पी और मां की आंखों से बहते आंसू इस सवाल का जवाब बन गए थे। खेती-किसानी से गुज़ारा करने वाले पिता के लिए बेटी का इलाज किसी पहाड़ चढ़ने से कम नहीं था। डॉक्टरों ने बताया कि शांभवी रियूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) से जूझ रही है। रायपुर में इलाज कराने की सलाह ने परिवार की हिम्मत तोड़ दी—“इतना खर्च कहां से आएगा?”
जब मंत्री के सामने आया मासूम सवाल
आखिरकार पिता अपनी बेटी को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के पास पहुंचे। शांभवी ने मासूम आवाज़ में मंत्री से कहा—“अंकल, मैं फिर से स्कूल जाऊंगी ना?” यह सुनते ही मंत्री जी की आंखें भी नम हो गईं। उन्होंने बच्ची का सिर सहलाया और पिता से कहा—“भाई साहब, अब चिंता मत कीजिए। आपकी बेटी मेरी बेटी है। इसका इलाज सरकार कराएगी। एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा।”
मां की आंखों से छलक पड़े आंसू
मंत्री के इन शब्दों ने परिवार की टूटी उम्मीदों को जैसे फिर से जिंदा कर दिया। शांभवी की मां ने कांपती आवाज़ में कहा—“मंत्री जी, आप हमारे लिए भगवान के दूत बनकर आए हैं। आपने हमारी बच्ची को नई जिंदगी दी है।”

संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण
जायसवाल ने तुरंत रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट (ACI) के वरिष्ठ डॉक्टर स्मित श्रीवास्तव से बात की और निर्देश दिया कि इलाज तुरंत शुरू हो। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया— “इस बच्ची का हर खर्च सरकार उठाएगी।”
नन्ही मुस्कान में लौटी उम्मीद
आज शांभवी इलाज के लिए रायपुर पहुंच चुकी है। जांच शुरू हो चुकी है। पिता की आंखों से आंसू सूख गए हैं और उनकी जगह उम्मीद की चमक है। मासूम शांभवी खिलखिलाकर पूछती है—
“पापा, मैं जल्दी से फिर से खेल पाऊंगी ना?” इस बार पिता ने उसे गले लगाकर कहा— “हाँ बेटी, ज़रूर। मंत्री अंकल हैं ना हमारे साथ।”
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