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EXPOSE : सरकारी स्कूल बना ‘प्राइवेट अड्डा’! प्रधान पाठक ने ‘किराए’ पर रखा है अपना रिप्लेसमेंट

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शिक्षा व्यवस्था से भद्दा मजाक, 12वीं पास युवक चला रहा प्राथमिक शाला मोहरसोप, कलेक्टर-मंत्री के नाम से भी है अनजान

नई पहल न्यूज नेटवर्क। सूरजपुर। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद ही हैरान कर देने वाला मामला सूरजपुर जिले से सामने आया है। यहाँ शासकीय प्राथमिक शाला मोहरसोप में शिक्षा के मंदिर को मजाक बनाकर रख दिया गया है। स्कूल में पदस्थ प्रधान पाठक ने अपनी जगह बच्चों को पढ़ाने और स्कूल संभालने के लिए एक निजी व्यक्ति को ‘काम’ पर रखा है।

खुद निजी कामों में व्यस्त, स्कूल ‘आउटसोर्स’ पर

​शासकीय प्राथमिक शाला मोहरसोप में पदस्थ प्रधान पाठक डी. एस. सिंह पर आरोप है कि वे महीने में सिर्फ इक्का-दुक्का दिन ही स्कूल का रुख करते हैं। अपनी गैर-मौजूदगी में स्कूल की जिम्मेदारी उन्होंने पूर्ण देव यादव नामक एक 12वीं पास युवक को सौंप रखी है। प्रधान पाठक स्वयं अपने निजी कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जबकि स्कूल का संचालन और बच्चों का भविष्य एक ऐसे युवक के भरोसे है जिसका शिक्षा विभाग से कोई आधिकारिक नाता नहीं है।

कलेक्टर और शिक्षा मंत्री का नाम तक नहीं पता !

​हैरानी की बात तो यह है कि जो युवक ‘प्रधान पाठक’ की कुर्सी पर बैठकर बच्चों को शिक्षा दे रहा है, उसे सामान्य ज्ञान तक का बोध नहीं है। पूछताछ में सामने आया कि तथाकथित शिक्षक पूर्ण देव यादव को सूरजपुर कलेक्टर और छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री तक का नाम पता नहीं है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस स्कूल में बच्चों को किस स्तर की शिक्षा मिल रही होगी।

बीईओ बोले- “यह घोर निंदनीय है, होगी कड़ी कार्रवाई”

​इस गंभीर लापरवाही पर जब ओडगी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) प्रदीप सिंह से बात की गई, तो उन्होंने मामले को बेहद गंभीर और निंदनीय बताया।

“यह पूरी तरह से मनमानी और नियमों के विरुद्ध है। कोई भी शासकीय शिक्षक अपनी जगह किसी निजी व्यक्ति से कार्य नहीं करा सकता। मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और प्रधान पाठक के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

प्रदीप सिंह, बीईओ ओडगी

सवाल प्रशासन पर: कब जागेगा विभाग ?

​यह मामला सिर्फ एक शिक्षक की लापरवाही का नहीं, बल्कि उन मासूम बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का है जो सरकारी व्यवस्था के भरोसे स्कूल आते हैं। अब देखना यह होगा कि खबर सुर्खियां बनने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस ‘फर्जीवाड़े’ पर कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करता है।

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