नई पहल न्यूज| नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इतिहास के एक ऐसे पन्ने का गवाह बना, जहाँ सत्ता का अहंकार झुका और छात्र-युवा आक्रोश की प्रचंड लहर ने केंद्र सरकार को बैकफुट पर ला दिया। नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और महीनों चले जन-आंदोलन के भारी दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ‘धर्मेंद्र का यह प्रस्थान’ न केवल वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जन-दबाव के कारण हुआ सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया है कि युवाओं की एकजुट ताकत के आगे कोई भी कुर्सी अचल नहीं है।


“यह निर्णय व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं”— पीएम मोदी को सौंपा त्यागपत्र
महीनों से जारी गतिरोध और देश भर में हो रहे उग्र प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंपा और इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी साझा की। अपने दो पन्नों के इस्तीफे में उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा:
“यह निर्णय मेरी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। देश की युवा शक्ति ही भारत की असली ताकत है। देश के छात्रों का भविष्य किसी कानूनी या राजनीतिक उलझन में न फंसे और कोई असामाजिक तत्व इस स्थिति का अनुचित फायदा न उठा सके, इसी को ध्यान में रखते हुए मैं अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ रहा हूँ।”
“हमने कर दिखाया, सरकार को झुकना ही पड़ा”— अभिजीत दीपके (CJP)
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर एकत्र हजारों छात्रों के बीच जश्न का माहौल बन गया। इस छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच पर आकर इस फैसले को लोकतंत्र और छात्र शक्ति की सबसे बड़ी जीत करार दिया।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर केवल दो शब्दों की पोस्ट से अपनी पहली प्रतिक्रिया दी— “DEMOCRACY WINS!” (लोकतंत्र की जीत!)
इसके बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने गरजते हुए कहा:
“हमने यह कर दिखाया! धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा। यह त्यागपत्र इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर देश का युवा डरेगा नहीं, इस सरकार की दमनकारी नीतियों के आगे झुकेगा नहीं, तो हम किसी भी बड़ी से बड़ी कुर्सी का इस्तीफा ले सकते हैं। छात्र शक्ति जिंदाबाद!”
जश्न के बीच 2 मिनट का मौन: “लड़ाई अभी अधूरी है”
अभिजीत ने भाषण के दौरान जश्न के माहौल को रोककर एक अत्यंत भावुक पहल भी की। उन्होंने परीक्षा धांधली और मानसिक तनाव के कारण अपनी जान गंवाने वाले पीड़ित छात्रों को याद करते हुए मंच से 2 मिनट का मौन रखवाया।
इसके साथ ही CJP प्रमुख ने स्पष्ट चेतावनी दी कि लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने सरकार के समक्ष दो नई माँगें रखीं:
- मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हुए पीड़ित छात्र-परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
- आंदोलन के दौरान निर्दोष छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं पर दर्ज किए गए सभी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं।
कैसे बढ़ा दबाव? घटनाक्रम पर एक नज़र
- परीक्षा में धांधली और पेपर लीक: NEET-UG के नतीजों के बाद देश भर में धोखाधड़ी के आरोप लगे, जिसने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता का बादल मंडरा दिया।
- सड़कों से संसद तक संग्राम: सोनम वांगचुक के अनशन और CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर चले बेमियादी धरने ने आंदोलन को राष्ट्रव्यापी रूप दे दिया।
- सीबीआई जांच और री-एग्जाम: भारी विरोध के बीच जांच सीबीआई को सौंपी गई और री-एग्जाम का आदेश दिया गया, लेकिन छात्रों की एकमात्र मांग ‘शिक्षा मंत्री का इस्तीफा’ बनी रही।
- अंतिम प्रस्थान: चौतरफा राजनीतिक घेराबंदी और जन-आंदोलन की लपटें तेज होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार कुर्सी छोड़नी पड़ी।
About The Author














