छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस का तीखा हमला: “संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी को कुचल रही भाजपा”
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने राज्य महिला आयोग की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आयोग की अध्यक्ष ममता साहू की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने एक कड़ा प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया है कि राज्य महिला आयोग अपने संवैधानिक कर्तव्यों को भूलकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के एक मोर्चा संगठन की तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि न्याय मांगने वाली बेटियों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, आयोग उन लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दे रहा है जो पीड़ित बच्चियों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।
“दलीय चाटुकारिता में संवैधानिक मर्यादा भूलीं महिला आयोग अध्यक्ष”
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जंतर-मंतर पर मासूम बेटियों के साथ हुए अमानवीय कृत्य को लेकर सोशल मीडिया पर न्याय की गुहार लगाने वाले कांग्रेस नेताओं और नागरिकों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए संगीता सिन्हा ने कहा:
दलीय चाटुकारिता में ममता साहू अपनी संवैधानिक मर्यादा और असल कर्तव्य को पूरी तरह भूल चुकी हैं। महिला आयोग का मूल काम महिलाओं और बेटियों के साथ हुए अत्याचार पर स्वतः संज्ञान लेना है, न कि अन्यायी और अत्याचारियों का ढाल बनना। जो लोग बेटियों के साथ हुए जुल्म के खिलाफ लिख रहे हैं, आयोग उन्हीं को प्रताड़ित करना चाहता है? यदि जरा सी भी नैतिकता बची है, तो ममता साहू को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
नीट छात्रा की आत्महत्या और जंतर-मंतर हादसे पर आयोग की चुप्पी पर सवाल
महिला कांग्रेस ने प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों और छात्राओं के साथ घटित दुखद घटनाओं पर राज्य महिला आयोग की मौन स्वीकृति पर भी कड़ा प्रहार किया:
- नीट छात्रा की दुखद आत्महत्या: जगदलपुर की 20 वर्षीय नीट छात्रा सुरला हारिका राव नायडू ने सरकारी सिस्टम और मानसिक तनाव से व्यथित होकर आत्मघाती कदम उठाया। इस तरह की प्रणालीगत विफलताओं के कारण 21 से अधिक होनहार युवाओं की जान जा चुकी है।
- सड़क हादसे में छात्रा की मौत: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित आंदोलन में शामिल होने जा रही छत्तीसगढ़ की एक अन्य छात्रा की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई।
संगीता सिन्हा ने सीधा सवाल दागा कि इन दर्दनाक मामलों पर राज्य महिला आयोग ने अब तक चुप्पी क्यों साध रखी है? क्या आयोग का दर्द केवल सत्ता के इशारों पर ही जागता है?
जेन-जी प्रदर्शन में बर्बरता: “निजी अंगों पर हमला और पेलेट गन का इस्तेमाल”
देशभर में हुए ‘जेन-जी (Gen-Z)’ प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए संगीता सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ से भी कई छात्राएं इस आंदोलन में शामिल होने गई थीं। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई की बर्बरता को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाए:
- पुरुष पुलिसकर्मियों का हमला: प्रदर्शनकारी महिला छात्रों पर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया और जानबूझकर उनके शरीर पर घातक वार किए गए।
- पेलेट गन और आंसू गैस: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया और कपड़े फाड़े गए। इसमें आउटलुक के एक पत्रकार सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
- मानवाधिकारों का हनन: सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा बेटियों को डंडों से पीटा गया, उनका खाना-पानी रोका गया और उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
“फेसबुक और इंस्टाग्राम बर्बरता के सबूतों से भरे हैं, संज्ञान कब लेंगे?”
संगीता सिन्हा ने अंत में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मासूम बच्चियों के साथ हुई बर्बरता के हजारों वीडियो और फोटो मौजूद हैं। इसके बावजूद महिला आयोग मूकदर्शक बना बैठा है।
उन्होंने सवाल किया कि आयोग को इन बेटियों का दर्द कब महसूस होगा और वह इन मामलों में स्वतः संज्ञान कब लेगा? उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी बेटियों के हक की लड़ाई सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक मजबूती से लड़ती रहेगी और अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने की किसी भी कुत्सित कोशिश का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
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