भरतपुर सोनहत के पूर्व विधायक और तहसीलदार के बीच ‘ईगो’ की जंग, उखड़े गुलाब कमरो ने सरेआम लगा दी क्लास
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़|छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘पहचान’ को लेकर एक ऐसा घमासान छिड़ा है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में उस वक्त स्थितियां विस्फोटक हो गईं, जब पूर्व विधायक गुलाब कमरो और एक महिला तहसीलदार के बीच तीखी बहस का ‘अखाड़ा’ सज गया। मामला केवल ज्ञापन देने का नहीं, बल्कि ‘अस्तित्व’ और ‘सम्मान’ का बन गया।
“झूठ बोलना बंद करें मैडम!” – जब पूर्व विधायक का धैर्य जवाब दे गया
वायरल वीडियो की शुरुआत ही हंगामे और नारों के साथ होती है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने तहसीलदार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें उस दिन का इंतजार था जब वे आमने-सामने होंगे।
आप कहती हैं मैं गुलाब कमरो को नहीं जानती? मैं तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुका हूँ, क्षेत्र का बच्चा-बच्चा जानता है और आप सफेद झूठ बोल रही हैं। क्या मैं बेवकूफ हूँ? ऐसी भाषा का प्रयोग एक जनप्रतिनिधि के लिए शोभा देता है क्या ?
- अहंकार की टक्कर: तहसीलदार के ‘न पहचानने’ वाले बयान को गुलाब कमरो ने अपना और जनता का अपमान बताया।
- कार्यशैली पर प्रहार: पूर्व विधायक ने दो टूक कहा कि अगर एक पूर्व विधायक के साथ अधिकारी का यह बर्ताव है, तो गरीब ग्रामीण जनता दफ्तरों में कितनी प्रताड़ित होती होगी।
- सरेआम घेराव: कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में तहसीलदार को उनकी ‘मर्यादा’ याद दिलाई गई।
- नारेबाजी का शोर: वीडियो में बैकग्राउंड में “अफसरशाही नहीं चलेगी” और “गुलाब कमरो जिंदाबाद” के स्वर गूंज रहे हैं।
प्रशासन बनाम राजनीति: एक बड़ा सवाल ?
यह विवाद केवल एक बहस नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय पूरी तरह खत्म हो चुका है? गुलाब कमरो ने जिस तल्खी के साथ तहसीलदार को “झूठ बोलने वाली अधिकारी” करार दिया, उससे साफ़ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ेगा।
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