नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़/रायपुर। छत्तीसगढ़ में “दिमागी नक्सली” शब्द के इस्तेमाल और एमबीबीएस दाखिले में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के बीच राजनीतिक टकराव बेहद तीखा हो गया है। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के बयान के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब सड़कों और थानों तक पहुंच गया है।

पहले स्वास्थ्य मंत्री का वार: “कांग्रेस की नक्सल-समर्थक मानसिकता आई सामने”
विवाद की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद और उससे जुड़ी मानसिकता पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया था।
- मंत्री का रुख: स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘दिमागी नक्सली’ से सचेत रहने की अपील के बाद कांग्रेस नेताओं की बौखलाहट सामने आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया, “जब-जब सुरक्षाबल और प्रदेश की भाजपा सरकार नक्सलियों पर कड़ी कार्रवाई करते हैं, तब-तब कांग्रेस का नक्सल-प्रेम जाग उठता है। नक्सलवाद को केवल एक ‘विचारधारा’ कहकर कांग्रेस निर्दोष आदिवासियों की हत्याओं और जवानों की शहादत पर पर्दा डालने की हास्यास्पद कोशिश कर रही है।”
- सरकार की नीति: मंत्री ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ‘गोली का जवाब गोली और विकास का जवाब विकास’ की नीति पर काम कर रही है और नियद नेल्लानार योजना के जरिए बस्तर के सुदूर इलाकों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
फिर NSUI की प्रतिक्रिया: “सवाल पूछने वाले छात्र नक्सली नहीं, मंत्री सार्वजनिक माफी मांगें”
स्वास्थ्य मंत्री के इस बयान के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं ने उग्र रुख अपनाया। NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मनेंद्रगढ़ के थाना कोतवाली पहुंचकर विरोध जताया और अपनी सामूहिक गिरफ्तारी की पेशकश की। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, पूर्व विधायक गुलाब कमरों, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सौरव मिश्रा और जिला NSUI अध्यक्ष कासिम अंसारी सहित अन्य नेता मौजूद रहे।
- NSUI का पक्ष: प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे ने कहा कि प्रदेश के छात्र एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया में बाहरी छात्रों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिला दिए जाने के गंभीर आरोपों पर सवाल उठा रहे हैं। सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
- सामूहिक गिरफ्तारी की मांग: NSUI नेताओं ने कहा कि अधिकार मांगने वाले छात्रों को ‘दिमागी नक्सली’ कहना लोकतंत्र का अपमान है। यदि मंत्री अपने बयान को सही मानते हैं तो कार्यकर्ताओं को जेल भेजा जाए, अन्यथा वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
राजनीतिक हलचल तेज
एमबीबीएस दाखिले में पारदर्शिता की मांग और ‘दिमागी नक्सली’ बयान को लेकर शुरू हुई यह बहस अब सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता और वैचारिक राजनीति के इर्द-गिर्द सिमट गई है। एक ओर जहां NSUI ने युवाओं के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई जारी रखने की घोषणा की है, वहीं सत्ता पक्ष इसे सुरक्षाबलों के मनोबल और बस्तर के शांति अभियानों से जोड़कर प्रस्तुत कर रहा है।
About The Author









































