मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला कांग्रेस ने प्रेस वार्ता कर सरकार और PSC प्रबंधन पर दागे तीखे सवाल, इंटरव्यू पर तत्काल रोक लगाने की मांग
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़ । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CG PSC) की परीक्षाओं में मूल्यांकन और इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) में आयोजित एक धमाकेदार प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने साक्ष्यों और अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं (उत्तर-पुस्तियों) के पन्नों को सार्वजनिक करते हुए सीजी पीएससी पर युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ करने का सीधा आरोप लगाया है।
प्रेसवार्ता को जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव एवं जिला कांग्रेस महामंत्री पूनम सिंह, पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष कृष्णमुरारी तिवारी, पूर्व जनपद सदस्य रफीक मेमन, पूर्व सरपंच अमोल सिंह मरावी, राम अवतार सिंगरौल ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। इस अवसर पर कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
“गलत जवाब पर नंबर, सही पर शून्य” — मूल्यांकन में सामने आईं चौंकाने वाली धांधलियां
कांग्रेस नेताओं ने वर्ष 2024 की मुख्य परीक्षा की जांच की गई कॉपियों का ब्योरा मीडिया के सामने रखते हुए कई सनसनीखेज खुलासे किए:
- समान उत्तर, फिर भी नंबरों में पक्षपात: प्रश्न क्रमांक 5(i) में दो अभ्यर्थियों ने बिल्कुल एक समान सही उत्तर लिखे, लेकिन एक छात्र को 2 में से 0 अंक मिले और दूसरे को 2 में से 2 पूरे अंक दिए गए।
- गलत उत्तर पर मेहरबानी: ‘भक्तिन माता राजिम’ वाले प्रश्न में सही उत्तर देने वाले छात्र को 8 में से 3.5 अंक मिले, जबकि गलत उत्तर लिखने वाले अभ्यर्थी को शून्य के बजाय 1.5 अंक दे दिए गए।
- होमरूल लीग स्थापना में भारी झोल: होमरूल लीग की स्थापना पर सही उत्तर लिखने वाले को 4 में से 2.5 अंक मिले, वहीं वर्ष 1923 एवं स्वराज दल लिखकर गलत उत्तर देने वाले छात्र को भी बराबर 2.5 अंक बांट दिए गए।
- घरेलू हिंसा एवं बौद्ध धर्म प्रश्न पर गड़बड़ी: सही और गलत उत्तर देने वाले दोनों अभ्यर्थियों को एक समान अंक देकर योग्य युवाओं के हक पर डाका डाला गया।
1:3 के नियम की अनदेखी, 187 अभ्यर्थियों को क्यों किया बाहर?
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव और महामंत्री पूनम सिंह ने आंकड़ों का गणित समझाते हुए कहा कि वर्ष 2025 में पीएससी द्वारा कुल 265 पद निकाले गए थे। नियमानुसार मुख्य परीक्षा से साक्षात्कार (Interview) के लिए 1:3 के अनुपात में 3 गुना अभ्यर्थियों (265 × 3 = 795) को चयन कर इंटरव्यू में बुलाया जाना चाहिए था।
लेकिन आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए पात्र घोषित किया और 187 अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंक न लाने की बात कहकर बाहर कर दिया। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आयोग यह साबित करे कि वे 187 बच्चे न्यूनतम अंक क्यों नहीं ला पाए, जबकि अभ्यर्थियों का दावा है कि उनका कट-ऑफ/न्यूनतम नंबर आया है।
अपात्र शिक्षकों से जंचवाई कॉपियां, दोषियों को सजा के बजाय ‘प्रमोशन’!
कांग्रेस नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 में उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच अपात्र स्कूली शिक्षकों (शिक्षक LB) से कराई गई। इतना ही नहीं, मूल्यांकनकर्ताओं के नाम और अंक तक सार्वजनिक हो गए, जिससे परीक्षा की गोपनीयता पूरी तरह भंग हो गई।
कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि भर्ती परीक्षा की गोपनीयता भंग करने और धांधली करने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय, तत्कालीन पीएससी अध्यक्ष रीता शांडिल्य को सरकार का संरक्षण देते हुए कार्यकारी अध्यक्ष से प्रमोट कर अध्यक्ष बना दिया गया।
कांग्रेस की मुख्य मांगें:
- इंटरव्यू पर तत्काल रोक: जब तक पूरे मामले का पारदर्शी निराकरण नहीं हो जाता, तब तक वर्तमान में आयोजित/प्रस्तावित इंटरव्यू स्थगित किए जाएं।
- कॉपियों को सार्वजनिक किया जाए: इंटरव्यू से पहले सभी अभ्यर्थियों को उनकी मूल्यांकित उत्तर-पुस्तिकाएं (कॉपियां) उपलब्ध कराई जाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
- मुफ्त कॉपियां एवं मॉडल उत्तर: मुख्य परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी किए जाएं तथा इंटरव्यू में चयनित बच्चों को छोड़कर अन्य शेष सभी अभ्यर्थियों को निशुल्क उत्तर-पुस्तिकाएं मुहैया कराई जाएं।
- 1:3 नियम का कड़ाई से पालन: मुख्य परीक्षा के परिणामों के बाद इंटरव्यू के लिए अनिवार्य रूप से 1:3 अनुपात के नियम का पालन किया जाए।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि भाजपा सरकार और पीएससी आयोग युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद कर पारदर्शिता नहीं लाते, तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक युवाओं की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाएगी।
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