छत्तीसगढ़ में 36 फीसदी महिला कलेक्टर : एमसीबी कलेक्टर संतन देवी जांगड़े बोली, महिलाओं को महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि उनकी योग्यता और त्वरित निर्णय लेने के कौशल पर शासन का अटूट भरोसा है

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नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में महिला नेतृत्व का एक नया और सशक्त दौर देखने को मिल रहा है। राज्य के 12 महत्वपूर्ण जिलों की बागडोर महिला कलेक्टर संभाल रही हैं, जिससे ज़मीनी स्तर पर शासन की कार्यशैली में संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय और जन-जुड़ाव का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। ‘नई पहल’ की इस खास श्रृंखला में आज का विशेष संवाद मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के साथ है। पेश हैं उनसे हुई खास बातचीत के मुख्य अंश।

1. छत्तीसगढ़ के 12 जिलों की कमान इस समय महिला कलेक्टरों के हाथ में है। आप इसे प्रशासनिक व्यवस्था में किस तरह के बदलाव के रूप में देखती हैं?

उत्तर: यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था में बढती लैंगिक समानता और संवेदनशीलता का प्रतीक है। महिलाओं को महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि उनकी योग्यता और त्वरित निर्णय लेने के कौशल पर शासन का अटूट भरोसा है। इससे जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ाव और मजबूत हो रहा है।

2. आपके अनुभव में महिला कलेक्टर होने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

उत्तर: महिला कलेक्टर होने का सबसे बड़ा फायदा सहज संवाद और संवेदनशीलता है। समाज का सबसे कमजोर तबका, विशेषकर ग्रामीण महिलाएं और बच्चे, अपनी समस्याएं बिना किसी झिझक के सीधे साझा कर पाते हैं, जिससे समस्याओं का सटीक समाधान संभव होता है।

3. क्या आपको लगता है कि महिला अधिकारी प्रशासन में कुछ ऐसे मुद्दों को ज्यादा संवेदनशीलता से देख पाती हैं, जिन्हें पुरुष अधिकारी अलग नजरिए से देखते हैं?

उत्तर: हाँ, पोषण, मातृत्व स्वास्थ्य, बाल विकास और पारिवारिक विषयों जैसे सामाजिक मुद्दों को महिलाएं अपने स्वाभाविक अनुभवों के कारण अधिक गहराई से समझ पाती हैं। हालांकि पुरुष अधिकारी भी सक्षम होते हैं, लेकिन महिलाओं का दृष्टिकोण इसमें अधिक सहानुभूतिपूर्ण और मानवीय पहलू से जुड़ा होता है।

4. आपके जिले में महिलाओं, बालिकाओं और परिवारों से जुड़े कौन-से मुद्दे आपकी प्राथमिकता में हैं?

उत्तर: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में महिलाओं और बालिकाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, सुपोषण, शिक्षा और नशामुक्त सुरक्षित माहौल मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों को सशक्त किया जा रहा है।

5. कलेक्टर के रूप में आपके सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती क्या रही और आपने उसका समाधान किस तरह किया?

उत्तर: नवगठित जिला होने के कारण बुनियादी ढांचे का विकास करना और शासकीय कार्यों में गति लाना सबसे बड़ी चुनौती रही है। हमने जिला अधिकारियों की मैराथन बैठकें लेकर सुस्त कार्यप्रणाली को दूर किया और नामांतरण बंटवारा जैसे लंबित राजस्व मामलों का समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित किया है।

6. क्या महिला कलेक्टर होने के कारण आम महिलाओं और बेटियों से संवाद करना या उनकी समस्याओं को समझना आसान होता है?

उत्तर: जी बिल्कुल, आम महिलाएं और बेटियाँ एक महिला अधिकारी को अपने बीच पाकर सुरक्षित और सहज महसूस करती हैं। वे घरेलू हिंसा, स्वास्थ्य या शिक्षा से जुड़ी अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या को बिना किसी सामाजिक संकोच के सीधे मेरे सामने रख पाती हैं।

7. प्रशासनिक फैसलों में संवेदनशीलता और सख्ती-इन दोनों के बीच संतुलन आप किस तरह बनाती हैं?

उत्तर: प्रशासन में “नीतियों में सख्ती और व्यवहार में संवेदनशीलता” मेरा मूल मंत्र है। आम जनता और उनकी जायज मांगों की सुनवाई करते समय पूरी संवेदनशीलता बरती जाती है। लेकिन जब बात अवैध क्लीनिकों, नशे के नेटवर्क या सरकारी कार्यों में लापरवाही की आती है, तो कड़ी और सख्त कार्रवाई की जाती है।

8. आपके जिले की ऐसी कौन-सी एक पहल है, जिसे आप महिला नेतृत्व की खास पहचान मानती हैं?

उत्तर: जिले के प्रसिद्ध अमृतधारा जलप्रपात परिसर में चलाया गया स्वच्छता और श्रमदान अभियान टीम-भावना का बेहतरीन उदाहरण है। स्व० सहायता समूहों, कौशल विकास, स्वरोजगार, शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास इसी सोच का हिस्सा है। मेरा मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से सक्षम और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ी पर पड़ता है।

9. क्या आपको कभी ऐसा लगा कि एक महिला अधिकारी होने के कारण आपको अपनी क्षमता साबित करने के लिए पुरुष अधिकारियों से ज्यादा मेहनत करनी पड़ी?

उत्तर: प्रशासनिक सेवा में योग्यता और कार्यशैली मायने रखती है, लिंग नहीं। शुरुआती दौर में हर अधिकारी को अपनी कार्य कुशलता से पहचान बनानी होती है। मैंने हमेशा अपने काम और अनुशासन को प्राथमिकता दी है, जिससे सहकर्मियों और जनता का पूरा सहयोग प्राप्त होता है।

10. आज की युवा लड़कियां प्रशासनिक सेवा में आने का सपना देख रही हैं। उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

उत्तर: युवा बेटियों के लिए मेरा संदेश है-“अपने सपनों पर अटूट विश्वास रखें और पूरी ईमानदारी से कड़ी मेहनत करें”। प्रशासनिक सेवा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का एक बेहतरीन मंच है। किसी भी चुनौती से डरे बिना, शिक्षा और आत्म-विश्वास के बल पर आगे बढ़ें। 

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