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चिरमिरी के लाहिड़ी कॉलेज में गूंजा ‘छात्र संघ चुनाव’ का नारा, NSUI ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन

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प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत चिरमिरी में छात्र शक्ति का प्रदर्शन; ब्लॉक अध्यक्ष तहसीन रजा बोले— “लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन अब बर्दाश्त नहीं”

नई पहल न्यूज नेटवर्क। चिरमिरी। छत्तीसगढ़ में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर छिड़ी जंग अब कोयलांचल नगरी चिरमिरी की गलियों से होते हुए कॉलेजों तक पहुंच गई है। सोमवार, 30 मार्च को शासकीय लाहिड़ी पी.जी. महाविद्यालय में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के आह्वान और जिला अध्यक्ष कासिम अंसारी के दिशा-निर्देश पर कार्यकर्ताओं ने प्राचार्य के माध्यम से महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर चुनावी बिगुल फूंक दिया है।

छात्र राजनीति की ‘तालाबंदी’ के खिलाफ आक्रोश

​ब्लॉक अध्यक्ष तहसीन रजा के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में संगठन ने कड़े शब्दों में प्रशासन को घेरा। छात्र नेताओं का कहना है कि प्रदेश के महाविद्यालयों में वर्षों से चुनाव न होना सीधे तौर पर छात्रों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटना है। जब कैंपस में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि ही नहीं होगा, तो छात्रों की छोटी-बड़ी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक कौन पहुँचाएगा?

प्रमुख मांगें: पारदर्शिता और तत्काल घोषणा

​NSUI ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि:

  1. ​प्रदेश के सभी कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव की तत्काल बहाली हो।
  2. ​पूरी चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराई जाए।
  3. ​शासन जल्द से जल्द चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा करे।

मैदान में डटे रहे ये छात्र नेता

​इस प्रदर्शन के दौरान संगठन की एकजुटता साफ नजर आई। मौके पर ब्लॉक अध्यक्ष तहसीन रजा के साथ जिला महासचिव सैफ नियाजी, जिला उपाध्यक्ष निखिल यादव, जिला सचिव अनश खान, काजी तौकीर, तरुण सोनकर और शिवम सिंह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

​साथ ही ऋषि दुबे, दिलीप अग्रहरी, विवेक सोनकर, नीरज शर्मा, अभिषेक लोधी, अमन खटीक, आर्यन खटीक, आदर्श, कुंवर देव, मोहम्मद फराज, राज केसरवानी, मोहम्मद आरिश और मोहम्मद उम्म सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर छात्र एकता के नारे लगाए।

चेतावनी: “यह तो बस शुरुआत है, आंदोलन होगा और उग्र”

​NSUI ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यह शांतिपूर्ण ज्ञापन केवल एक चेतावनी है। यदि सरकार ने छात्रों की नेतृत्व क्षमता को निखारने वाली इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जल्द बहाल नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन ‘आर-पार की जंग’ में बदल जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

“छात्र संघ चुनाव छात्रों को जिम्मेदारी और नेतृत्व सिखाते हैं। इसे बंद रखना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”

तहसीन रजा, ब्लॉक अध्यक्ष NSUI

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