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वीडियो : संसद में गूंजी छत्तीसगढ़ के ‘अफीम कांड’ की गूँज : सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने उधेड़ी सिस्टम की बखिया

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मक्के की आड़ में नशा, सोता रहा सरकारी सैटेलाइट ? कोरबा सांसद ने लोकसभा में पूछा क्या राजनीतिक सिंडिकेट क पाल रहा है प्रशासन ?

नई पहल न्यूज नेटवर्क। नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ में बलरामपुर और दुर्ग जिले में मक्के की फसल के बीच छिपाई गई अफीम की अवैध खेती का मुद्दा अब देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी ‘लोकसभा’ में पूरी ताकत के साथ गूंज उठा है। कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने सदन में केंद्रीय मंत्री को सीधे घेरे में लेते हुए सरकार के सुरक्षा और निगरानी दावों की धज्जियां उड़ा दीं।

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की इकलौती महिला सांसद के इस तेवर ने दिल्ली के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

मक्के के बीच अफीम, कहाँ था आपका हाई-टेक सिस्टम ?

​लोकसभा में अपनी बात रखते हुए ज्योत्सना महंत ने सरकार के उस दावे पर प्रहार किया, जिसमें कहा जाता है कि सैटेलाइट के जरिए देश के कोने-कोने में अफीम की निगरानी की जा रही है। उन्होंने कड़े लहजे में पूछा— “जब छत्तीसगढ़ के दुर्ग और बलरामपुर में मक्के की आड़ में अफीम की खेती लहलहा रही थी, तब आपका यह सैटेलाइट सिस्टम आखिर कहाँ सोया हुआ था? यह तकनीक इसे पकड़ने में नाकाम क्यों रही?”

राजनीतिक सिंडिकेट और प्रशासनिक मिलीभगत का सनसनीखेज आरोप

​सांसद ने इस पूरे प्रकरण को महज एक ‘चूक’ न मानकर इसे एक गहरी ‘प्रशासनिक और राजनीतिक मिलीभगत’ करार दिया। उन्होंने सदन के पटल पर तीन बड़े सवाल दागकर सरकार को निरुत्तर कर दिया:

  1. सिस्टम ने आँखें क्यों मूंदी? क्या जानबूझकर सिस्टम ने चुप्पी साधी ताकि एक खास ‘राजनीतिक सिंडिकेट’ को फलने-फूलने का मौका मिल सके?
  2. सूचना के बाद भी देरी क्यों? जनवरी में सूचना मिलने के बावजूद मार्च के दूसरे हफ्ते तक कार्रवाई क्यों टाली गई? क्या यह फसल कटने का इंतजार था?
  3. प्रशासनिक संरक्षण: क्या बिना अफसरों की शह के इतने बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित खेती संभव है?

सत्ता पक्ष के करीबियों पर उठ रही उंगलियां

​गौर करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ में अफीम की यह खेती उन खेतों से पकड़ी गई है जिनका जुड़ाव कथित तौर पर सत्ताधारी दल के नेताओं से बताया जा रहा है। ज्योत्सना महंत ने इसी नस पर हाथ रखते हुए सरकार से जवाब मांगा है कि क्या भ्रष्टाचार और नशे के इस कारोबार को ‘खास लोगों’ के फायदे के लिए संरक्षण दिया जा रहा है?

खबर का सार

​कोरबा सांसद का यह भाषण केवल एक सवाल नहीं, बल्कि उन दावों पर तमाचा है जो ‘नशा मुक्त भारत’ की बात करते हैं। जब सरगुजा और दुर्ग जैसे संभागों में मक्के की आड़ में मौत का सामान उगाया जा रहा हो, तो प्रशासन की चुप्पी कई बड़े चेहरों को बेनकाब करती है।

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