शिव-पार्वती विवाह प्रसंग में साकार हुई मानवता विधायक ने माँ बनकर निभाया कन्यादान का फर्ज
सियासत के आंगन में ममता की छांव, जब विदाई की सिसकियों ने पूरी सभा की आंखें भिगो दीं
नई पहल न्यूज नेटवर्क। सोनहत (कोरिया)। धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पीड़ित और असहायों की सेवा का नाम है। इस कथन को कोरिया की धरती पर चरितार्थ किया है क्षेत्रीय विधायक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने। सोनहत में आयोजित शिवमहापुराण कथा के दौरान जब शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग गूंज रहा था, तभी एक ऐसा दृश्य जीवंत हुआ जिसने वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं के कलेजे को झकझोर कर रख दिया।

भावनाओं का ज्वार: “आज आप ही मेरी मां हैं…”
विदाई का वह पल किसी पत्थर दिल को भी पिघला देने वाला था। जिन अनाथ बेटियों ने कभी माता-पिता का साया नहीं देखा, जब उनके कन्यादान की रस्म विधायक रेणुका सिंह ने निभाई, तो बेटियां उनसे लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़ीं। एक बेटी की सिसकियों ने सन्नाटे को चीरते हुए जब कहा— “मेरी मां नहीं है… आज आप ही मेरी मां हैं,” तो पंडाल में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। यह विदाई केवल एक रस्म नहीं, बल्कि वर्षों के अभाव के बाद मिले ममत्व का सैलाब था।
राजनीति से परे, अटूट रिश्तों की डोर



विधायक रेणुका सिंह इस भावुक पल में एक नेता नहीं, बल्कि एक मां और संरक्षक के रूप में नजर आईं। उन्होंने रूंधे गले से कहा, “आज से यह मेरी बेटी है, मैंने इसका कन्यादान किया है।” यह सुनकर पूरे वातावरण में संवेदनाओं का संचार हो गया।
धर्म जब समाज सेवा का माध्यम बना
कथा के चौथे दिन व्यासपीठ से भी सेवा का संदेश दिया गया। कथावाचक ने घोषणा की कि उस दिन चढ़ावे में आई समस्त दान-दक्षिणा नवदंपति को उनके नए जीवन की नींव मजबूत करने के लिए समर्पित की जाएगी। इस अवसर पर बैकुंठपुर विधायक भैया लाल राजवाड़े और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी उपस्थित रहीं। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे ‘नेतृत्व और ममता का अनूठा उदाहरण’ बताया।
एक नई मिसाल की शुरुआत
सोनहत की यह शिवमहापुराण कथा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और करुणा की एक नई गाथा बन गई है। समाज ने देखा कि कैसे एक जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के असहाय लोगों का संबल बनकर उनके जीवन में खुशियों के रंग भर सकता है।




