कर्तव्य की वेदी और कलम की साधना: जिपं सीईओ के उपन्यास का ‘कवर पेज’ रिलीज, कलेक्टर बोलीं— असाधारण है यह अनुशासन
नई पहल न्यूज नेटवर्क|बैकुंठपुर। प्रशासनिक गलियारों की फाइलों वाली दुनिया में जब संवेदनाएं शब्द बनकर कागज पर उतरती हैं, तो ‘यक्षिणी’ जैसी कृतियां जन्म लेती हैं। कोरिया जिले के जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने यह साबित कर दिया है कि व्यस्तता केवल एक बहाना है, यदि मन में सृजन की तड़प हो। बिलासपुर की मिट्टी से निकले डॉ. आशुतोष के पहले उपन्यास ‘यक्षिणी’ के मुख्य पृष्ठ (कवर पेज) का अनावरण समारोह साहित्य और प्रशासन के एक अनूठे संगम के रूप में संपन्न हुआ।


रात के सन्नाटे में बुनी गई ‘मैकल’ की दास्तान
यह खबर केवल एक पुस्तक के कवर लॉन्च की नहीं, बल्कि एक अधिकारी के उस संघर्ष की है जिसने दिन भर की फील्ड ड्यूटी और बैठकों के बाद रात के सन्नाटे को अपना ‘लेखन काल’ बनाया।
- प्रेरणा: वर्ष 2022 से शुरू हुआ यह सफर मैकल पर्वत श्रृंखलाओं की उन अनकही और अनछुए पहलुओं पर आधारित है, जिन्हें डॉ. आशुतोष ने अपनी पदस्थापना के दौरान करीब से महसूस किया।
- संवेदना: उन्होंने प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य और मानवीय अनुभूतियों को एक धागे में पिरोकर ‘यक्षिणी’ का स्वरूप दिया है।
कलेक्टर की नजर में: “प्रशासनिक टीम के लिए गौरव का क्षण”
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने इस पल को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा:
पूरी प्रशासनिक टीम जिले के विकास के लिए अथक परिश्रम करती है, लेकिन उस थकान के बाद समय निकालकर साहित्य सृजन करना डॉ. आशुतोष की रचनात्मकता और उनके कठोर अनुशासन को दर्शाता है। यह हम सभी के लिए प्रेरणास्पद है।
झुमका तट पर सजेगा 100 सितारों का कारवां

खबर की सबसे बड़ी और दमदार बात यह है कि ‘यक्षिणी’ का पूर्ण विमोचन 23 मई को होगा। यह कोई साधारण विमोचन नहीं होगा, बल्कि कोरिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल झुमका के तट पर ‘जश्ने-जबां’ का आयोजन किया जाएगा।
- महाकुंभ: इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने देश भर से 100 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार, कलमकार और कलाकार कोरिया की धरा पर उतरेंगे।
साहित्यिक गलियारों में गूंज
होटल गंगाश्री के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में अपर कलेक्टर सुरेंद्र वैद्य, डीडी मंडावी, एसडीएम उमेश पटेल सहित सरगुजा अंचल के दिग्गज साहित्यकार सतीश उपाध्याय, वीरेंद्र श्रीवास्तव और गजलकार ताहिर आजमी ने शिरकत की। कार्यक्रम में प्रशासन और साहित्य के दिग्गजों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि डॉ. आशुतोष की यह कृति आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी।
प्रशासनिक कार्यशैली और रचनात्मकता के बीच एक नए पुल का निर्माण
अक्सर ब्यूरोक्रेसी को शुष्क और भावनाओं से परे माना जाता है, लेकिन डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी की यह ‘साहित्यिक छलांग’ बताती है कि एक संवेदनशील हृदय ही बेहतर लोकसेवक हो सकता है। ‘यक्षिणी’ का मुखपृष्ठ केवल एक किताब की शुरुआत नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली और रचनात्मकता के बीच एक नए पुल का निर्माण है।
About The Author














