नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने जनहित, किसान कल्याण और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को सदन के समक्ष प्रमुखता से रखा। अपनी ही सरकार के मंत्रियों के सामने उन्होंने गन्ना किसानों के हितों के संरक्षण, त्वरित भुगतान, आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, उर्वरकों की उपलब्धता और दलहन खरीदी की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न किए और ध्यानाकर्षण कराया। विधायक बोहरा के इन प्रयासों पर संबंधित मंत्रियों ने सदन के पटल पर विस्तृत और सकारात्मक उत्तर प्रस्तुत किए।
1. गन्ना किसानों का संरक्षण: ‘समयबद्ध भुगतान और ठोस नीति की मांग’
विधायक भावना बोहरा ने सदन का ध्यानाकर्षण करते हुए कबीरधाम, बेमेतरा, बालोद और सरगुजा सहित अनेक जिलों के गन्ना किसानों की चिंताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए भुगतान प्रक्रिया को और तेज़ करना आवश्यक है।
महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव:
- गन्ना प्रोत्साहन राशि में वृद्धि कर किसानों को वास्तविक लाभ दिया जाए।
- छत्तीसगढ़ में भी गन्ना किसानों के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) घोषित हो।
- सहकारी शक्कर कारखानों के लिए ‘राज्य स्तरीय रिवॉल्विंग फंड’ स्थापित कर पर्याप्त कार्यशील पूंजी दी जाए।
- पंडरिया के ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल शक्कर कारखाने’ का मासिक शक्कर विक्रय कोटा बढ़ाया जाए ताकि किसानों का समय पर भुगतान हो।
2. पर्यटन को नई ऊंचाई: ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ के लिए ₹100 करोड़
राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं:
- औद्योगिक विकास नीति 2024-30: इस नीति के अंतर्गत पर्यटन क्षेत्र में निवेश को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले 3 वर्षों में प्राप्त 79 निवेश प्रस्तावों में से 68 को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है।
- बजट का बड़ा प्रावधान: नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में “मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन” के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत विस्तृत प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं।
- नए स्थलों का विकास: पिछले 3 सालों में प्राप्त 464 प्रस्तावों में से 23 विकास कार्यों और 2 नए पर्यटन स्थलों के चिन्हांकन की स्वीकृति दी जा चुकी है। साथ ही 45 गाइडों को प्रशिक्षित किया गया है।
3. आदिवासी क्षेत्रों का विकास: दूरस्थ अंचलों में त्वरित प्रशासनिक कार्यवाही पर ज़ोर
अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में बुनियादी विकास कार्यों की तकनीकी और प्रशासकीय स्वीकृति में तेज़ी लाने के विषय पर कैबिनेट मंत्री श्री रामविचार नेताम ने जवाब दिया।
- त्वरित निराकरण के प्रयास: मंत्री ने बताया कि यद्यपि तकनीकी व प्रशासकीय स्वीकृति के लिए कोई अधिकतम समय-सीमा तय नहीं है, फिर भी दूरस्थ क्षेत्रों से प्राप्त प्रस्तावों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाता है।
- शिकायतों पर संज्ञान: बस्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण मद के अंतर्गत जिला कोण्डागांव से अधिकारियों द्वारा असहयोग या विलंब की प्राप्त 01 शिकायत पर शासन ने तुरंत संज्ञान लिया है। इसकी जांच के लिए कलेक्टर कोण्डागांव को पत्र लिखा गया है और कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
4. कृषि सुदृढ़ीकरण: उर्वरकों की उपलब्धता और कालाबाजारी पर सख्त एक्शन
खरीफ वर्ष 2026 में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों की मांग व आपूर्ति पर विधायक बोहरा के सवाल के जवाब में विभागीय मंत्री ने किसानों के हक में की गई कड़ी कार्यवाहियों का विवरण दिया:
- सख्त निगरानी: खरीफ 2026 में 30 जून तक 4,337 और पिछले वित्त वर्ष में 6,757 औचक निरीक्षण किए गए।
- अनियमितताओं पर कार्रवाई: कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री और जमाखोरी के खिलाफ कुल 163 प्रकरण दर्ज किए गए। इनमें से 47 के उर्वरक विक्रय लाइसेंस निलंबित, 11 निरस्त, 38 प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत और 8 मामलों में FIR दर्ज की गई है।
- सप्लाई की स्थिति: यूरिया (मांग 7.25 लाख टन, आपूर्ति 5.25 लाख टन) और डीएपी (मांग 3 लाख टन, आपूर्ति 1.49 लाख टन) सहित अन्य उर्वरकों की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है।
5. दलहन खरीदी: 3 कार्य दिवसों के भीतर DBT से भुगतान सुनिश्चित
रबी विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य (MSP) पर चना और दलहन फसलों की खरीदी तथा किसानों के भुगतान की स्थिति भी सदन में स्पष्ट की गई।
- डीबीटी भुगतान व्यवस्था: ‘प्राईस सपोर्ट स्कीम’ के तहत चने की खरीदी केन्द्रीय उपार्जन एजेंसी नेफेड (NAFED) एवं एनसीसीएफ (NCCF) के माध्यम से की जा रही है। गोदाम में स्टॉक जमा होने और वेयरहाउस रिसीप्ट (WHR) जनरेट होने के 3 कार्य दिवसों के भीतर सीधे किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से भुगतान का नियम है।
- उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग: इस प्रक्रिया को सरल और सुचारू बनाने के लिए ‘एकीकृत किसान पोर्टल’, ‘ई-समृद्धि’ और ‘ई-समयुक्ति’ पोर्टल काम कर रहे हैं। साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ‘स्टेट लेवल मॉनिटरिंग कमिटी’ इसकी निरंतर निगरानी कर रही है।
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