सखी वन स्टॉप सेंटर से लेकर रेडी-टू-ईट आहार और कबीरधाम में खाद्यान्न भंडारण क्षमता पर पूछे तीखे सवाल; विभागीय मंत्रियों ने पटल पर रखे महत्वपूर्ण आंकड़े
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/कबीरधाम। छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के अंतिम दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने सदन में जनता से जुड़े संवेदनशील और विकासपरक मुद्दों को बेहद मजबूती से उठाया। विधायक बोहरा ने महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों के पोषण व संरक्षण तथा किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कबीरधाम जिले में खाद्यान्न भंडारण क्षमता को लेकर सिलसिलेवार प्रश्न किए। महिला एवं बाल विकास मंत्री और खाद्य मंत्री द्वारा दिए गए लिखित जवाबों से प्रदेश में इन योजनाओं की जमीनी हकीकत और बड़े आंकड़े सामने आए हैं।
महिला सुरक्षा: 3 साल में सखी सेंटरों ने सुलझाए घरेलू हिंसा के 10 हजार से अधिक मामले
विधायक भावना बोहरा ने राज्य में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली और महिलाओं को मिलने वाली सहायता पर सवाल पूछा था।
महिला एवं बाल विकास मंत्री द्वारा दिए गए लिखित उत्तर के मुख्य बिंदु:
- संचालित केंद्र: प्रदेश में वर्तमान में 42 सखी वन स्टॉप सेंटर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
- प्रकरणों का निराकरण: पिछले 3 वर्षों में घरेलू हिंसा के 12,359 मामले सामने आए, जिनमें से 10,543 का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इसके अलावा दहेज प्रताड़ना के 83, यौन उत्पीड़न के 386 और अन्य महिला हिंसा के 8,531 मामलों को सुलझाया गया है।
- प्रदत्त सहायता: इन केंद्रों के माध्यम से 3 साल में 10,661 महिलाओं को मनोसामाजिक परामर्श, 1,484 को कानूनी सहायता, 1,755 को चिकित्सा सहायता और 7,330 महिलाओं को अस्थायी आश्रय दिया गया।
पोषण आहार: रेडी-टू-ईट के लिए 440 करोड़ रुपये से अधिक का हुआ व्यय
प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बांटे जाने वाले रेडी-टू-ईट, मीठा शक्ति आहार और नमकीन पौष्टिक दलिया के बजट पर भावना बोहरा ने जानकारी मांगी। विभागीय मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में इसके निर्माण, क्रय और वितरण के लिए 441.56 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसमें से 440.73 करोड़ रुपये जनहित में व्यय किए जा चुके हैं।
बाल संरक्षण: ‘मिशन वात्सल्य’ के जरिए तस्करी और बाल विवाह पर कड़ा प्रहार
बच्चों के समग्र विकास और पुनर्वास की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए पंडरिया विधायक ने बाल गृहों की स्थिति जाननी चाही। लिखित उत्तर में बताया गया कि:
- राज्य में बच्चों के संरक्षण के लिए वर्तमान में ‘मिशन वात्सल्य योजना’ चलाई जा रही है।
- वर्तमान में प्रदेश में 109 बाल देखरेख संस्थाएं (बाल गृह, खुला आश्रय गृह, विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरण आदि) और 33 जिला बाल संरक्षण समितियां कार्यरत हैं।
- पिछले 3 वर्षों में बाल श्रम उन्मूलन सप्ताह, ड्रग्स रोकथाम अभियान, बाल तस्करी और बाल विवाह रोकने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाए गए। रेस्क्यू किए गए बच्चों को बालक कल्याण समिति के माध्यम से पुनर्वासित किया गया है।
किसान और भंडारण: कबीरधाम में 75 हजार टन से अधिक भंडारण क्षमता, पर 86 राशन दुकानें जर्जर
कबीरधाम जिले के किसानों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को मजबूत करने के लिए विधायक भावना बोहरा ने गोदामों की स्थिति पर सवाल किया। खाद्य मंत्री ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि:
- भंडारण क्षमता: जिले में राज्य भंडार गृह निगम के 37 गोदाम हैं, जिनकी कुल क्षमता 75,487 टन है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आवश्यकता के लिए पर्याप्त है।
- जर्जर भवनों की स्थिति: निगम के मुख्य खाद्यान्न गोदाम तो सुरक्षित हैं, लेकिन जिले में उचित मूल्य दुकान सह गोदाम के कुल 86 भवन जर्जर स्थिति में हैं। विभागीय बजट में प्रावधान होने पर इन जर्जर दुकानों व गोदामों की मरम्मत कराई जाएगी।
विधायक का संकल्प: सत्र के समापन के बाद पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि महिलाओं, बच्चों और किसानों से जुड़ी इन बुनियादी योजनाओं की मैदानी मॉनिटरिंग वे खुद करती रहेंगी ताकि अंतिम व्यक्ति तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंच सके।
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