कर्नाटक में डीके शिवकुमार की ताजपोशी पर बोले सिंहदेव– ‘जब नेतृत्व ध्यान देने वाला हो, तो सब कुछ सही हो जाता है’, छत्तीसगढ़ में फिर गूंजा ढाई-ढाई साल का दर्द
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/बेंगलुरु। कर्नाटक में करीब ढाई साल बाद सत्ता का फॉर्मूला बदलते ही उसकी तपिश छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में पूरी शिद्दत से महसूस की जा रही है। कर्नाटक में सिद्धारमैया की जगह डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनते ही छत्तीसगढ़ का ‘ढाई-ढाई साल’ का पुराना जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया है। इस पूरे सियासी घमासान के केंद्र में हैं छत्तीसगढ़ के दिग्गज नेता और पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव, जिनके एक सोशल मीडिया पोस्ट ने छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं और भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का एक बड़ा हथियार दे दिया है।

प्राथमिकता से पढ़ें : टी.एस. सिंहदेव का वह सोशल मीडिया पोस्ट जिसने बढ़ाई हलचल
टी.एस. सिंहदेव ने सोशल मीडिया पर बेहद सधे हुए लेकिन गहरे सियासी मायने रखने वाले शब्दों में अपनी बात रखी। छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिहाज से इस पोस्ट की एक-एक लाइन बेहद संवेदनशील मानी जा रही है:
टी.एस. सिंहदेव का आधिकारिक बयान:
“कर्नाटक के नवनियुक्त मुख्यमंत्री के रूप में श्री @DKShivakumar जी और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर बेहद खुशी हुई।”
“नए मुख्यमंत्री को अपनी हार्दिक बधाई दी और श्री @siddaramaiah जी से मिलने का सम्मान मिला—एक ऐसे अनुभवी नेता, जिन्होंने एक बार फिर उस अनुशासन और समर्पण का प्रदर्शन किया है जो एक सच्चे कांग्रेसी की पहचान है। हाईकमान के फैसले को उनकी (सिद्धारमैया की) सहज स्वीकार्यता उनके नेतृत्व कौशल (Statesmanship) और गरिमा को दर्शाती है।“
“जो बात वास्तव में सबसे अलग और खास रही, वह थी इस कार्यक्रम का शानदार और सुचारू आयोजन… इस तरह के आयोजन एक शक्तिशाली संदेश देते हैं: जब नेतृत्व ध्यान देने वाला (Attentive) हो, तो सब कुछ सही जगह पर आ जाता है।“
सिंहदेव की पोस्ट के क्या हैं छिपे हुए सियासी मायने ?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि टी.एस. सिंहदेव ने भले ही यह पोस्ट कर्नाटक के संदर्भ में लिखी हो, लेकिन इसके तीर सीधे छत्तीसगढ़ के पुराने घटनाक्रम पर जाकर लगते हैं:
- ‘हाईकमान का फैसला और अनुशासन’: सिंहदेव का सिद्धारमैया के ‘अनुशासन’ और पद छोड़ने की ‘सहज स्वीकार्यता’ की तारीफ करना, सीधे छत्तीसगढ़ कांग्रेस के उस दौर (2018-2023) की याद दिलाता है जब भूपेश बघेल और सिंहदेव के बीच ढाई-ढाई साल के कार्यकाल को लेकर लंबा विवाद चला था, लेकिन सत्ता का ऐसा शांतिपूर्ण हस्तांतरण यहाँ नहीं हो सका।
- ‘जब नेतृत्व ध्यान देने वाला हो…’: सिंहदेव की इस लाइन को तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस और दिल्ली आलाकमान की भूमिका पर एक मौन कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ ढाई साल के वादे को समय पर नहीं सुलझाया जा सका था।
भाजपा का हमला: “सिंहदेव के साथ हुआ था धोखा”
टी.एस. सिंहदेव के इस पोस्ट को हाथों-हाथ लपकते हुए छत्तीसगढ़ भाजपा ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि:



- कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में दोहरा मापदंड: भाजपा का आरोप है कि कर्नाटक में तो कांग्रेस ने ढाई साल का वादा निभा दिया, लेकिन छत्तीसगढ़ में सरगुजा महाराज (टी.एस. सिंहदेव) के साथ सरासर ‘छल’ किया गया। उन्हें हक से महरूम रखा गया।
- सिंहदेव का दर्द आया सामने: भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि सिंहदेव का यह ट्वीट उनके दिल में छिपे उसी पुराने दर्द और उपेक्षा की गूंज है, जिसे उन्होंने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन के दौरान झेला था।
जख्म फिर हुए हरे
कर्नाटक का यह ‘सक्सेसफुल ट्रांसफर ऑफ पावर’ छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए एक असहज करने वाली स्थिति बन गया है। सिंहदेव के इस ट्वीट ने साफ कर दिया है कि भले ही वक्त बीत गया हो, लेकिन छत्तीसगढ़ की सियासत में ‘ढाई-ढाई साल’ की टीस आज भी जिंदा है। अब देखना यह है कि भाजपा इस अंदरूनी कलह के मुद्दे को आने वाले दिनों में और कितना भुनाती है।










