नई पहल न्यूज नेटवर्क। पेंड्रा। छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और उनकी पत्नी व कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, बेटे सूरज महंत के साथ एक दिवसीय प्रवास पर पेंड्रा पहुंचे। महंत दंपत्ति ने यहां हाल ही में हुए सनसनीखेज हत्याकांड के शिकार, मृतक सराफा व्यवसायी प्रदीप सोनी के तेरहवीं कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने प्रदीप सोनी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए चरण दास महंत ने प्रदेश की कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों को लेकर तीखा हमला बोला।
“पेंड्रा के इतिहास में ऐसा खौफनाक गोलीकांड पहले कभी नहीं हुआ”
सराफा व्यवसायी की निर्मम हत्या पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसे एक बेहद दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया। उन्होंने कहा:
”पेंड्रा जैसी शांत जगह पर इस तरह की गोलीकांड की घटना पहले कभी नहीं सुनी गई थी। आज स्थिति यह हो गई है कि बीच बाजार में भी हमारे व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं। इसके साथ ही प्रदेश में महिला संबंधी अपराधों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो बेहद चिंताजनक है।”
बढ़ते अपराधों की जड़ में ‘सूखा नशा’ और ‘संरक्षण’ का खेल
चरण दास महंत ने इस तरह की हिंसक वारदातों के पीछे की मुख्य वजहों को उजागर करते हुए सीधे तौर पर ‘सूखे नशे’ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा करते हुए गंभीर आरोप लगाए:
- वहशीपन का शिकार युवा: महंत ने कहा कि सूखा नशा करने वाला व्यक्ति अपने होश खो बैठता है और वहशीपने का शिकार होकर इस तरह की खौफनाक वारदातों को अंजाम देता है।
- पुलिस और समाज के संरक्षण का आरोप: उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि इस पूरे खेल को समाज के कुछ हिस्सों और पुलिस का मूक संरक्षण प्राप्त है। बिना किसी ठोस संरक्षण और सह के इतनी बड़ी और दुस्साहसिक घटनाएं घटित होना मुमकिन नहीं है।
व्यापारियों और आम जनता में असुरक्षा का माहौल
इस हाई-प्रोफाइल दौरे और नेता प्रतिपक्ष के कड़े बयानों के बाद पेंड्रा सहित पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छिड़ गई है। दिनदहाड़े या व्यस्त बाजारों में होने वाले ऐसे अपराधों ने न सिर्फ व्यापारियों बल्कि आम जनता के मन में भी डर पैदा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि विपक्ष के इस तीखे हमले के बाद पुलिस प्रशासन और सरकार सूखे नशे के इस जाल को तोड़ने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
About The Author














