सूरजपुर के ढाई हजार से अधिक शिक्षकों ने पेश की मानवता की बेमिसाल नज़ीर, असमय काल के गाल में समाए शिक्षक साथियों के आश्रितों को मिल रहा आर्थिक और संबल का सुरक्षा कवच
सौरभ साहू। नई पहल न्यूज नेटवर्क। सूरजपुर। कभी बेहद अल्प वेतन पर ‘शिक्षाकर्मी’ के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले राष्ट्र निर्माताओं ने आज एकजुटता और मानवीय संवेदना की एक ऐसी अनुपम गाथा लिख दी है, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच, सूरजपुर जिले के शिक्षकों ने एक अनूठी पहल के जरिए साबित कर दिया है कि यदि इरादे नेक हों तो बूंद-बूंद से भी समंदर तैयार किया जा सकता है। जिले में कार्यरत शिक्षकों द्वारा गठित ‘संयुक्त संवेदना समिति’ आज संकट की घड़ी में शिक्षक परिवारों के लिए सबसे बड़ा संबल बनकर उभरी है। मात्र 500-500 रुपये के सालाना छोटे से अंशदान से शुरू हुए इस कारवां ने अब तक दिवंगत शिक्षक साथियों के परिवारों को 31 लाख रुपये की सहायता राशि सौंपकर संवेदना की एक अभूतपूर्व मिसाल कायम की है।
विपदा के समय ‘सचिन त्रिपाठी’ के नेतृत्व ने दिखाई राह
समिति के सदस्यों से मिली जानकारी के अनुसार, जब किसी शिक्षक साथी का असामयिक निधन होता है, तो परिवार पर दुखों के पहाड़ के साथ-साथ गंभीर आर्थिक संकट भी मंडराने लगता है। इन्हीं मर्मस्पर्शी और विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए सूरजपुर के सजग शिक्षकों ने सचिन त्रिपाठी के कुशल नेतृत्व में ‘संयुक्त संवेदना समिति’ का ढांचा तैयार किया। इस समिति की सबसे खास बात यह है कि इसका प्रत्येक सदस्य शिक्षक प्रतिवर्ष मात्र पाँच सौ रुपये की नाममात्र राशि का सहयोग करता है, जो आज कई परिवारों का अंधकार दूर कर रहा है।
हमारा उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता प्रदान करना नहीं है, बल्कि संकट में घिरे शिक्षक परिवारों के भीतर यह विश्वास जगाना है कि वे समाज में अकेले नहीं हैं। पूरा शिक्षक परिवार हर परिस्थिति में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
– संयुक्त संवेदना समिति
हाल ही में दो पीड़ित परिवारों को सौंपी ₹1-1 लाख की सहायता राशि
समिति से जुड़े सक्रिय सदस्य सतीश साहू, पुष्पराज पाण्डेय, मोहम्मद महमूद एवं प्रमोद पाठक ने बताया कि इसी चालू माह में दो अत्यंत दुःखद घटनाएं सामने आईं। प्रेमनगर विकासखण्ड के माध्यमिक शाला उमेश्वरपुर में पदस्थ शिक्षक उमेश्वर प्रसाद तथा ओड़गी विकासखण्ड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओड़गी में कार्यरत व्याख्याता अशोक कुमार विश्वकर्मा का असमय निधन हो गया।
समिति ने त्वरित कदम उठाते हुए बिना किसी प्रशासनिक औपचारिकता के विलंभ के, दोनों शोकाकुल परिवारों के घर पहुंचकर एक-एक लाख रुपये की संवेदना राशि प्रदान की। इस भावुक क्षण में समिति के पदाधिकारियों ने रोते-बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाया और भविष्य में भी हर संभव सहायता का अटूट भरोसा दिया।
ढाई हजार से अधिक शिक्षक बने इस पुनीत अभियान का हिस्सा
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में जिले के भीतर एक वृहद सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। इस अनूठे और पवित्र सेवा भाव से प्रभावित होकर जिले के लगभग 2,500 (ढाई हजार) से अधिक शिक्षक इस अभियान से जुड़ चुके हैं। यह संगठन आज सिर्फ एक समिति नहीं, बल्कि शिक्षक परिवारों के बीच आपसी आत्मीयता, भाईचारे और सामाजिक सुरक्षा का एक अभेद्य किला बन चुका है।
संवेदना राशि वितरण के दौरान जुटे जिले के दिग्गज शिक्षाविद
इस अत्यंत संवेदनशील और गरिमामयी राशि वितरण कार्यक्रम के दौरान संयुक्त संवेदना समिति के जिला संचालक सचिन त्रिपाठी के साथ-साथ ओड़गी के विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) प्रदीप कुमार सिंह, प्राचार्य बालकरण यादव, राजकुमार सिंह, ऋषि पाण्डेय, राजेश सिंह, राधेश्याम साहू, विश्वनाथ, सतीश साहू, पुष्पराज पाण्डेय, संतोष साहू, विजय त्रिपाठी, ओमप्रकाश साहू, मुनेश्वर सिंह, लक्ष्मण सिंह, तनेश्वर सिंह, शिवकुमार गुप्ता, जगजीवन सिंह, हेमंत साहू, तेजदास, महेंद्र प्रताप सिंह और कुंवारों देवी सहित भारी संख्या में शिक्षक और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। शिक्षकों की इस अनूठी और स्वैच्छिक पहल की पूरे सूरजपुर जिले और शिक्षा विभाग में जमकर सराहना हो रही है।
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