विद्या समीक्षा केंद्र की जियो-लोकेशन व्यवस्था पस्त; एक ही मोबाइल से सहकर्मी का आईडी-पासवर्ड डालकर दर्ज की जा रही फर्जी उपस्थिति
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लेटलतीफी और गायब रहने की आदत पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने जिस हाई-टेक ‘विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप’ को मास्टरस्ट्रोक माना था, शिक्षकों ने उसका भी ‘काट’ ढूंढ निकाला है। स्कूल परिसर में कदम रखे बिना, घर बैठे ऑनलाइन हाजिरी लगाने का एक नया और अनोखा ‘जुगाड़’ शिक्षा तंत्र में तेजी से फल-फूल रहा है। जिन शिक्षकों को डिजिटल तकनीक के जरिए अनुशासन में बांधने का दावा किया गया था, वे अब तकनीक की ही कमियों का फायदा उठाकर व्यवस्था की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।
ऐसे दर्ज हो रही है ‘फर्जी ऑनलाइन हाजिरी’ (खेल का तरीका)
वीएसके ऐप की मूल शर्त यह है कि शिक्षक को स्कूल परिसर (जियो-लोकेशन) के भीतर रहकर ही सुबह और छुट्टी के समय उपस्थिति दर्ज करनी होगी। लेकिन शिक्षकों ने इस व्यवस्था को दरकिनार करने का तरीका ढूंढ लिया है:
- पासवर्ड की अदला-बदली: अनुपस्थित रहने वाला शिक्षक स्कूल में मौजूद अपने किसी साथी शिक्षक को अपना यूज़र आईडी और पासवर्ड बता देता है।
- एक ही डिवाइस से मल्टीपल लॉगिन: स्कूल में उपस्थित शिक्षक पहले अपने मोबाइल से अपनी हाजिरी लगाता है, फिर ऐप से लॉगआउट कर अनुपस्थित शिक्षक का आईडी-पासवर्ड डालकर उसकी भी ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कर देता है।
- सिस्टम का धोखा खाना: चूंकि मोबाइल स्कूल परिसर के अंदर ही मौजूद होता है, इसलिए ऐप लोकेशन को सही मानकर उपस्थिति स्वीकार कर लेता है और गैर-हाजिर शिक्षक की हाजिरी दर्ज हो जाती है।
शुरुआती विरोध से ‘जुगाड़ की सुविधा’ तक का सफर
शुरुआती दिनों में शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने इस ऐप की जटिलताओं और नेटवर्क संबंधी समस्याओं को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। लेकिन अब यह असमंजस दूर हो चुका है और शिक्षकों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि ऐप में “अब कोई दिक्कत नहीं है।” स्कूल जाए बिना भी एक-दूसरे की मदद से हाजिरी लगाई जा रही है।
क्या है ‘वीएसके ऐप’ का असल उद्देश्य ?
- राष्ट्रीय स्तर का डिजिटल ढांचा: विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप राज्य सरकार की एक उच्चस्तरीय डिजिटल निगरानी व्यवस्था है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया गया है।
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग: इसका उद्देश्य स्कूलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, शिक्षकों की समय पर उपस्थिति, पठन-पाठन का स्तर और मूल्यांकन की निगरानी करना है।
- पारदर्शिता का दावा: इस ऐप के जरिए मध्याह्न भोजन, पुस्तक वितरण और निर्माण कार्यों जैसी योजनाओं की लाइव रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित की जाती है।
अधिकारी हैरान, लेकिन लिखित शिकायत का इंतजार
राज्य सरकार ने जिस पारदर्शिता के उद्देश्य से यह डिजिटल व्यवस्था लागू की थी, उसकी धज्जियां उड़ते देख शिक्षा विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। हालांकि:
- विभागीय रुख: अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।
- कार्रवाई की चेतावनी: यदि जांच के दौरान इस तरह की धोखाधड़ी पकड़ी जाती है, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- तकनीकी जांच का विकल्प: विभागीय सूत्रों के मुताबिक, शिकायत मिलने पर आईपी एड्रेस और लॉगिन डिवाइस आईडी की डिजिटल फोरेंसिक जांच कराकर यह पता लगाया जा सकता है कि एक ही मोबाइल से कितने शिक्षकों की हाजिरी दर्ज हुई है।
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