कहीं बच्चों को पढ़ाया, तो कहीं खुद लगाया स्कूली ड्रेस का बटन; फर्श पर बैठकर ग्रामीणों के बीच ‘सरकार’ नहीं ‘बेटी’ बनकर पहुँचीं नम्रता
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नारायणपुर। शासन की महत्वाकांक्षी ‘नियद नेल्ला नार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना की हकीकत जानने के लिए नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने एक बार फिर मिसाल पेश की है। बस्तर की बेटी और जिले की कमान संभाल रहीं नम्रता जैन ने अबूझमाड़ के उन बीहड़ों और पथरीले रास्तों की दूरी बाइक पर पीछे बैठकर तय की, जहाँ चार पहिया वाहनों का पहुँचना नामुमकिन है। 110 किलोमीटर का यह दुर्गम सफर तय कर जब वे ग्राम जाटलूर पहुँचीं, तो प्रशासनिक तामझाम से दूर उनका एक बेहद मानवीय और संवेदनशील चेहरा सामने आया।
जब कलेक्टर ने खुद लगाया बच्चे की शर्ट का बटन
दौरे की सबसे भावुक तस्वीर तब सामने आई जब स्कूल निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने एक छोटे बच्चे की स्कूल ड्रेस का बटन खुला देखा। उन्होंने बिना किसी संकोच के खुद झुककर बच्चे का बटन लगाया। इतना ही नहीं, उन्होंने कक्षा में बच्चों के साथ खड़े होकर राष्ट्रगान गाया और खुद ब्लैकबोर्ड पर चौक थामकर बच्चों को पढ़ाते हुए उनकी शिक्षा का स्तर भी परखा।
ग्राउंड जीरो पर एक्शन: हैंडपंप चलाकर जांचा पानी
प्रोटोकॉल को किनारे रख, कलेक्टर नम्रता जैन जाटलूर में ग्रामीणों के साथ फर्श पर बैठ गईं और उनकी छोटी-बड़ी समस्याओं को सुना। उनकी कार्यशैली तब और प्रभावी दिखी जब उन्होंने खुद हैंडपंप चलाकर पानी की शुद्धता की जांच की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत हर पात्र ग्रामीण को बुनियादी सुविधाएं और सरकारी लाभ मिलना ही चाहिए।
शिक्षा और सुविधाओं का प्रत्यक्ष जायजा
कलेक्टर ने अपने इस मैराथन दौरे में ढोंढरबेड़ा, कुड़मेल और जाटलूर के बालक आश्रमों, आंगनबाड़ी केंद्रों और बाजार स्थल का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों को नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
बस्तर की माटी की पहचान
गीदम (बस्तर) की रहने वाली नम्रता जैन संभाग की पहली महिला आईएएस हैं। वे उस भूगोल को बखूबी समझती हैं, जहाँ आज भी पहुंचना एक चुनौती है। इससे पहले भी वे 100 किमी बाइक का सफर तय कर उन इलाकों में जा चुकी हैं जहाँ दशकों से कोई कलेक्टर नहीं पहुँचा था। गौरतलब है कि उनके पति निखिल राखेचा भी कांकेर में एसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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