छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया : बैलों के घुंघरुओं की खनक और सुआ-करमा की थाप पर सजेगी विधायक दीपेश साहू की बारात 21 जोड़ों संग सरकारी मंडप में विवाह बंधन में बंधेंगे विधायक दीपेश साहू

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सियासत के इतिहास का सबसे बड़ा ‘डाउन टू अर्थ’ फैसला, बैलगाड़ी पर सजेगी ‘माननीय’ की बारात, खुद सीएम विष्णुदेव साय बनेंगे इस ऐतिहासिक पल के गवाह !

नई पहल न्यूज नेटवर्क। बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के सियासी और सामाजिक इतिहास में कल एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है, जो न इससे पहले कभी देखा गया और न सुना गया। इसे राजनीति का सबसे ‘डाउन टू अर्थ’ और ऐतिहासिक कदम कहिए, जहाँ सत्ता की चकाचौंध और वीआईपी कल्चर को किनारे रखकर एक सिटिंग एमएलए आम जनता की कतार में खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई मौजूदा विधायक, करोड़ों के आलीशान खर्चों को ठुकराकर, सरकार की गरीब और जरूरतमंद बेटियों के लिए बनी योजना के तहत सामूहिक विवाह करने जा रहे हैं। जी हां, बेमेतरा के युवा विधायक दीपेश साहू कल (31 मई को) मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 21 आम जोड़ों के साथ एक ही पंडाल, एक ही मंडप में अपनी होने वाली दुल्हन तरुणा साहू के साथ सात फेरे लेंगे। और इस ऐतिहासिक शादी का गवाह बनने के लिए दूल्हा बने ‘माननीय’ किसी चमचमाती विदेशी कार से नहीं, बल्कि माटी की महक लिए ‘बैलगाड़ी’ पर सवार होकर निकलेंगे!

इतिहास रचती ‘बैलगाड़ी वाली बारात’: जब संस्कृति चूमेगी आसमान

​आज के दौर में जब रसूखदारों की शादियों में हेलीकॉप्टर से एंट्री और विदेशी थीम पर पानी की तरह पैसा बहाया जाता है, तब विधायक दीपेश साहू का यह फैसला पूरे देश के अमीर और रसूखदारों के मुंह पर एक करारा तमाचा है। विधायक ने विशुद्ध छत्तीसगढ़ी ग्रामीण और पारंपरिक रीति-रिवाजों को अपनाकर अपनी माटी के प्रति अगाध प्रेम दिखाया है। कल जब बैलों के गले में बंधी घंटियों की रुनझुन और छत्तीसगढ़ी सुआ-करमा लोकगीतों की गूंज के बीच विधायक की बैलगाड़ी वाली बारात बेमेतरा की सड़कों पर निकलेगी, तो वह सिर्फ एक बारात नहीं होगी, बल्कि वो छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान और संस्कृति का वो ‘गोल्डन मोमेंट’ होगा जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा।

कोई VIP ट्रीटमेंट नहीं: आम लोगों की तरह सरकारी दफ्तर में कराया रजिस्ट्रेशन

​इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खूबसूरत बात यह है कि विधायक दीपेश साहू ने कोई विशेष वीआईपी व्यवस्था नहीं मांगी। उन्होंने आम जनता की तरह सम्मानपूर्वक ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग में बकायदा अपना फॉर्म भरा और पंजीयन कराया। विभाग के अधिकारी चंद्रबेश सिंह सिसोदिया ने बताया कि तैयारियां अपने अंतिम और भव्य रूप में हैं और पूरे स्टाफ के लिए यह बेहद गर्व का विषय है कि वे इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं।

महामंच पर जुटेंगे महादिग्गज: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद करेंगे कन्यादान का स्वागत

​छत्तीसगढ़ के इस पहले और अनूठे ऐतिहासिक विवाह समारोह की गूंज राजधानी रायपुर तक है। इस अद्भुत विवाह के गवाह बनने खुद सूबे के मुखिया आ रहे हैं। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने बताया:

​”यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण है। इस सामूहिक विवाह महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होकर नवयुगलों को आशीर्वाद देंगे। साथ ही शासन के कई कैबिनेट मंत्री, कद्दावर नेता और प्रदेशभर के वीआईपी इस ऐतिहासिक सादगी के साक्षी बनेंगे।”

​प्रशासन ने सुरक्षा, बैठक व्यवस्था और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के साथ मेहमानों के स्वागत के लिए बेहद पुख्ता और कड़े इंतजाम किए हैं।

“नेता नहीं, बेटा हूँ”— इस नारे को विधायक दीपेश साहू ने आज सचमुच चरितार्थ कर दिया है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में दर्ज होने जा रही यह अनोखी शादी समाज को एक नई दिशा दिखाएगी। जब एक जनप्रतिनिधि अपनी सुख-सुविधाओं का अहंकार त्याग कर, समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर, एक ही मंडप में जीवन की नई शुरुआत करता है… तो लोकतंत्र और हमारी संस्कृति की खूबसूरती हजार गुना बढ़ जाती है। बेमेतरा की धरती से शुरू होने वाली सादगी की यह नई क्रांति, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महान मिसाल बनेगी।

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