दिल्ली से चला ‘लांबा’ चाबुक : छत्तीसगढ़ में बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक की सभी कमेटियां तुरंत भंग; दिग्गजों के कोटेदार बाहर, अब सीधे दिल्ली दरबार तय करेगा नया चेहरा !
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारे में शनिवार को उस वक्त भूचाल आ गया, जब अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा के एक कड़े फरमान ने पूरे प्रदेश संगठन की चूलें हिला दीं। महिला कांग्रेस को नए सिरे से जिंदा करने के लिए दिल्ली आलाकमान ने एक बड़ा ‘सांगठनिक एनकाउंटर’ किया है। जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस की वर्तमान कार्यकारिणी को ‘तत्काल प्रभाव’ से भंग कर दिया गया है।
इस ऐतिहासिक और कड़े फैसले के बाद से रायपुर से लेकर दिल्ली तक के कांग्रेसी खेमे में सन्नाटा पसर गया है। इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह बदलाव केवल ऊपरी स्तर पर नहीं हुआ है, बल्कि प्रदेश, जिला, ब्लॉक और सीधे जमीनी स्तर (बूथ लेवल) की सभी कमेटियों का वजूद एक झटके में मिटा दिया गया है।
‘परिक्रमा’ युग का अंत, ‘परफॉर्मेंस’ राज की शुरुआत: इन 5 कड़े टेस्ट से गुजरेगा नया नेतृत्व
सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ में विपक्ष में आने के बाद भी महिला कांग्रेस की सुस्ती से केंद्रीय नेतृत्व बेहद खफा था। अलका लांबा ने साफ कर दिया है कि अब केवल बड़े नेताओं के बंगलों पर हाजिरी लगाने से पद नहीं मिलेगा। नई कार्यकारिणी के लिए ‘फाइव-स्टार’ (5) कड़े पैमाने तय किए गए हैं:
- ग्राउंड रियलिटी: सिर्फ सोशल मीडिया नहीं, जमीन पर कितनी सक्रियता है?
- मेंबरशिप का हिसाब: सदस्यता अभियान में किसने कितनी महिलाओं को जोड़ा?
- जनता से सीधा संवाद: आम महिलाओं के मुद्दों पर कितनी गहरी पकड़ है?
- सड़क की लड़ाई: सरकार की नीतियों के खिलाफ लाठियां खाने और संघर्ष करने का माद्दा।
- पार्टी से वफादारी: गुटबाजी और व्यक्तिगत निष्ठा छोड़कर सिर्फ संगठन के प्रति समर्पण।
स्थानीय क्षत्रपों की ‘वीटो पावर’ सीज, कोटेबाजी पर लगा परमानेंट लॉक !
इस पत्र की सबसे बड़ी और अंदरूनी इनसाइड स्टोरी यह है कि अब छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस में स्थानीय बड़े नेताओं की मर्जी और ‘सिफारिशी राज’ पूरी तरह खत्म हो चुका है। आदेश में दो टूक शब्दों में लिखा गया है:
“सभी नियुक्तियाँ एवं सांगठनिक जिम्मेदारियाँ केवल और सीधे अखिल भारतीय महिला कांग्रेस द्वारा व्यापक चर्चा एवं सर्वसम्मति के उपरांत घोषित की जाएंगी।”
साफ है कि अब रायपुर के बड़े नेताओं के कोटे से पद बांटने का खेल बंद हो गया है। अब किसी भी महिला नेत्री को अगर पद चाहिए, तो उसे सीधे दिल्ली (AICC) के सामने अपनी काबिलियत का रिपोर्ट कार्ड पेश करना होगा।
खड़गे, पायलट और बघेल को भेजी गई ‘फरमान’ की कॉपी; साफ संदेश- ‘नो इंटरफेरेंस’
मामला कितना संवेदनशील है, इसका पता इस बात से चलता है कि इस कड़े आदेश की प्रतिलिपि (Copy) कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट को भेजी गई है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के दिग्गज क्षत्रपों—पूर्व सीएम भूपेश बघेल, पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंह देव, पीसीसी चीफ दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत को भी यह कॉपी भेजी गई है। राजनीतिक पंडित इसे आलाकमान का एक सीधा संदेश मान रहे हैं कि महिला कांग्रेस के इस नए प्रयोग में कोई भी बड़ा नेता दखलंदाजी न करे।
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