बड़ा खुलासा : पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह की कथनी और करनी में अंतर; चुनावी मेहनत का कर्ज सरकारी खजाने से उतारने का आरोप
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। क्षेत्र की विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह, जिन्होंने चुनाव के वक्त ‘पारदर्शिता’ और ‘न्याय’ का वादा किया था, अब खुद अपनी ही जनसंपर्क निधि को लेकर सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंदों के लिए आरक्षित राशि को विधायक ने अपने करीबियों, भाजपा कार्यकर्ताओं, रसूखदार ठेकेदारों और रिश्तेदारों में रेवड़ियों की तरह बांट दिया है।




दस्तावेजों ने खोली पोल: ‘गरीब’ की सूची में ठेकेदार और रसूखदार
दस्तावेजों की पड़ताल से साफ पता चलता है कि जिन लोगों को “आर्थिक सहायता” के नाम पर राशि जारी की गई है, वे असल में आर्थिक रूप से संपन्न और रसूखदार पदों पर बैठे हैं।
- ठेकेदार को मिली मदद: सूची में अनिल यादव का नाम दर्ज है, जो ‘यादव कंस्ट्रक्शन’ के मालिक और एक बड़े ठेकेदार हैं।
- सरकारी कर्मचारी भी लाभार्थी: सिंगार साय राजवाड़े, जो स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं, उन्हें भी सरकारी खजाने से मदद दी गई।
- अपनों पर इनायत: जय मंगल सिंह (पिता भगवान सिंह), जो वर्तमान विधायक प्रतिनिधि, जिला पंचायत कोरिया के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व जनपद सदस्य हैं, उनके पिता को भी इस निधि का लाभ दिया गया।
- कार्यकर्ताओं का ‘पुरस्कार’: भाजपा हसदेव मंडल के महामंत्री भगवान दास, भाजपा कार्यकर्ता हेमंत राजवाड़े, होलिका राजवाड़े और देव लाल जैसे कई नाम सूची में शामिल हैं, जिन्हें आर्थिक रूप से कमजोर बताकर भुगतान किया गया। यहाँ तक कि फ्लेक्स प्रिंटिंग व्यवसाय चलाने वाले आदित्य नंदन गुप्ता को भी नहीं छोड़ा गया।
चुनाव पूर्व जो वादे किए, सत्ता मिलते ही उन्हें भुलाया
हैरानी की बात यह है कि विधानसभा चुनाव के दौरान रेणुका सिंह ने तत्कालीन विधायक गुलाब कमरो पर जनसंपर्क निधि के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए पर्चे बंटवाए थे। तब उन्होंने दहाड़ते हुए कहा था कि— “मेरे विधायक बनने के बाद यह राशि सिर्फ और सिर्फ जरूरतमंदों को मिलेगी।” लेकिन सत्ता की कुर्सी संभालते ही उन्होंने अपनी ही बातों को दरकिनार कर दिया। सूत्रों की मानें तो विधायक ने खुद स्वीकार किया था कि चुनाव में मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को ‘पुरस्कार’ स्वरूप यह राशि बांटी गई है।
विज्ञापन के लिए भी सरकारी निधि का इस्तेमाल ?
गंभीर आरोप यह भी है कि मीडिया में अपनी छवि चमकाने और विज्ञापनों का भुगतान करने के लिए भी जनसंपर्क निधि का रास्ता चुना गया, जिसे दस्तावेजों में ‘आर्थिक सहायता’ का चोला पहनाया गया है। यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन और जनता के विश्वास के साथ धोखाधड़ी है।
“जनता को जवाब देना होगा” – गुलाब कमरो (पूर्व विधायक)
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा:
रेणुका सिंह जी ने चुनाव के समय बड़े-बड़े आदर्श बघारे थे। आज उनकी असलियत जनता के सामने है। जरूरतमंदों के हक का पैसा भाजपा कार्यकर्ताओं और ठेकेदारों की जेब में डाला जा रहा है। जिस भ्रष्टाचार का आरोप उन्होंने मुझ पर लगाया था, आज वे खुद उससे कहीं बड़े दलदल में फंसी हैं। सरकारी पैसे का इस तरह से राजनीतिक बंदरबांट करना निंदनीय है। क्षेत्र की जनता इस धोखे का जवाब आने वाले समय में जरूर देगी।
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