जबलपुर के ‘रेवा महोत्सव’ में बिलासपुर की नन्ही नृत्यांगना ने बिखेरा जलवा, राष्ट्रीय मंच पर हासिल किया प्रथम स्थान
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बिलासपुर/जबलपुर। “मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।” इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिखाया है बिलासपुर के मोपका क्षेत्र की मात्र 5 वर्षीय नन्ही प्रतिभा शानवी वस्त्रकार ने। जबलपुर में आयोजित प्रतिष्ठित ‘रेवा महोत्सव’ में अपनी घुंघरुओं की झंकार से शानवी ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि कला उम्र की मोहताज नहीं होती।
राष्ट्रीय मंच पर ‘शिशु वर्ग’ में बनीं विजेता
आदिदेव कला संस्थान द्वारा आयोजित अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्तर संगीत, नृत्य एवं वाद्य प्रतियोगिता में देश भर के दिग्गज कलाकारों ने हिस्सा लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच शानवी ने कथक नृत्य (शिशु वर्ग) की एकल श्रेणी में अपनी प्रस्तुति दी। मंच पर उनके आत्मविश्वास, सटीक पदचाप और मनमोहक भाव-भंगिमाओं ने जजों और दर्शकों, दोनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विशेषज्ञों ने माना- ‘दुर्लभ है यह प्रतिभा’
शानवी की इस जादुई प्रस्तुति पर कला जगत के दिग्गजों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की:
- अखिलेश पटेल (निदेशक, रेवा महोत्सव): “इतनी कम उम्र में शास्त्रीय नृत्य की ऐसी शुद्धता और लय का तालमेल वाकई दुर्लभ है।”
- वर्षा चौहान (प्राचार्या): “शानवी का अनुशासन और कला के प्रति समर्पण उसे भविष्य में महान ऊंचाइयों तक ले जाएगा।”
- निर्णायक मंडल (पियूष मोटघरे एवं अंकिता गिनारा झा): जजों ने शानवी की मंच पर पकड़ और उत्कृष्ट भाव-प्रदर्शन को भविष्य की एक बड़ी कलाकार के संकेत बताए।
क्षेत्र में हर्ष की लहर
शानवी की इस स्वर्णिम सफलता से उनके परिजनों सहित पूरे मोपका क्षेत्र में खुशी का माहौल है। आदिदेव कला संस्थान परिवार ने भी इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया है।
खास बात: 5 साल की उम्र में जहां बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं शानवी ने भारतीय शास्त्रीय कला को अपनाकर नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल पेश की है। उनकी यह सफलता अब छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा का नया स्रोत बन गई है।
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