नई पहल न्यूज नेटवर्क। पामगढ़। कड़ाके की ठंड और सत्ता की बेरुखी के बीच पामगढ़ के किसानों के हक में आज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने हुंकार भरी। विधायक शेषराज हरबंश की मौजूदगी और नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और किसानों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। खरीफ सीजन में धान बेचने के लिए टोकन न मिलने से आक्रोशित किसानों का गुस्सा आज सड़कों पर फूट पड़ा। कांग्रेस ने इसे ‘विष्णु का कुशासन’ करार देते हुए प्रदेश की साय सरकार को किसान विरोधी बताया।
“अन्नदाता हताश, सरकार मदहोश”: पामगढ़ की सड़कों पर गूंजा नारा
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पामगढ़ द्वारा आयोजित इस घेराव कार्यक्रम में विधायक शेषराज हरबंश ने सीधे तौर पर प्रशासन और सरकार की ‘कुनीति’ को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पामगढ़ क्षेत्र का किसान आज अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन सरकार केवल आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त है।
विधायक शेषराज हरबंश का बयान
“आज छत्तीसगढ़ में ‘विष्णु का कुशासन’ चरम पर है। भाजपा सरकार ने किसानों से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि आज पामगढ़ का किसान एक अदद टोकन के लिए एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहा है। यह सरकार केवल चुनिंदा लोगों की है, गरीब किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। ब्लॉक कांग्रेस का यह आंदोलन सिर्फ एक चेतावनी है— यदि हमारे अन्नदाता को उसका हक नहीं मिला, तो हम इस तानाशाही सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।”
दिग्गजों का जमावड़ा: कांग्रेस की एकजुटता ने दिखाया दम
ब्लॉक कांग्रेस के इस कार्यक्रम में विधायक शेषराज हरबंश के साथ क्षेत्र के कई कद्दावर नेता कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। इस दौरान प्रमुख रूप से:
- पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह
- ब्लॉक अध्यक्ष नवल सिंह
- शाकम्भरी बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष रामकुमार पटेल
- वरिष्ठ नेता नीरज खूँटे, हरप्रसाद साहू, सुरेश तिवारी, किशोर सिंह, घासीराम चौहान सहित समस्त जोन अध्यक्षों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
एसडीएम को चेताया: “किसानों की खामोशी को कमजोरी न समझें”
घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। विधायक शेषराज हरबंश ने स्वयं एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि धान खरीदी की समय सीमा और टोकन वितरण की व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसानों को टोकन जारी नहीं किए गए, तो ब्लॉक कांग्रेस उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।







