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भीषण गर्मी का सितम : दीपका में प्यासे राहगीर, शोपीस बने आरओ प्लांट, पार्षद हिमांशु देवांगन ने CMO के खिलाफ खोला मोर्चा

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पारा चढ़ते ही पेयजल संकट गहराया, वार्ड 16 के पार्षद ने पत्र लिखकर की बंद पड़े आरओ प्लांट को शुरू करने और सार्वजनिक प्याऊ घरों की स्थापना की मांग

नई पहल न्यूज नेटवर्क। दीपका|छत्तीसगढ़ में सूर्यदेव के ‘रौद्र रूप’ ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त करना शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, दीपका नगरपालिका क्षेत्र में पेयजल की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है। भीषण तपिश के बीच सबसे ज्यादा मार उन राहगीरों और ग्रामीणों पर पड़ रही है, जिन्हें मुख्य बाजारों में एक बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। जनहित के इस मुद्दे पर वार्ड क्रमांक 16 के सक्रिय पार्षद हिमांशु देवांगन ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को पत्र सौंपा है और प्रशासन को उसकी सोई हुई जिम्मेदारी याद दिलाई है।

लाखों के आरओ प्लांट बने ‘सफेद हाथी’

​पार्षद हिमांशु देवांगन ने अपने पत्र में प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि नगर के सार्वजनिक स्थानों पर लाखों रुपये की लागत से लगाए गए आरओ (RO) प्लांट आज महज शोपीस बनकर रह गए हैं।

  • रखरखाव का अभाव: देखरेख की कमी और तकनीकी खराबी के कारण ये प्लांट लंबे समय से बंद हैं।
  • जनता को दोहरी मार: भीषण गर्मी में शीतल जल उपलब्ध न होने के कारण लोगों को या तो प्यासा रहना पड़ रहा है या मजबूरन महंगी बोतलबंद पानी खरीदनी पड़ रही है।
  • प्रमुख चौराहों और बस स्टैंड पर तत्काल प्रभाव से मिट्टी के घड़ों या वाटर कूलर वाले प्याऊ घर स्थापित किए जाएं।
  • निर्धन वर्ग का ध्यान: बाजार आने वाले ग्रामीणों और मजदूरों के पास पानी खरीदने के पैसे नहीं होते, उनके लिए यह जीवन रक्षक कदम होगा।
  • त्वरित मरम्मत: बंद पड़े सभी आरओ प्लांट की टेक्निकल ऑडिट कराकर उन्हें 24 घंटे के भीतर शुरू किया जाए।
  • शीतल जल केंद्र: भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में नए प्याऊ घर खोले जाएं।
  • नियमित मॉनिटरिंग: पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष टीम तैनात की जाए जो रोजाना पानी की उपलब्धता की जांच करे।

प्रशासन की चुप्पी और जनता की उम्मीदें

​नगर के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि गर्मी के शुरुआती दौर में ही जल संकट ने डराना शुरू कर दिया है। यदि पार्षद हिमांशु देवांगन की मांगों पर तत्काल अमल नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्थिति बेकाबू हो सकती है। अब गेंद नगरपालिका प्रशासन के पाले में है—देखना होगा कि क्या CMO कार्यालय फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर प्यासी जनता को राहत पहुँचाता है या नहीं।

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