नई पहल न्यूज नेटवर्क। बालोद/गुरुर। धान खरीदी के अंतिम दो दिन शेष रहने के बीच बालोद जिले में हालात विस्फोटक हो गए हैं। गुरुर ब्लॉक के सनौद धान खरीदी केंद्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने किसानों के साथ मिलकर केंद्र में तालाबंदी कर दी और वहीं धरने पर बैठ गईं। किसानों को टोकन जारी न होने और ‘रकबा समर्पण’ के खेल के खिलाफ विधायक के इस रौद्र रूप ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं।
“अधिकारी को बुलाओ, तभी खुलेगा ताला”: विधायक की दो टूक
खरीदी केंद्र में तालाबंदी के बाद मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार को विधायक संगीता सिन्हा के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। विधायक ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक जवाबदेह उच्च अधिकारी मौके पर आकर किसानों की समस्या का ठोस समाधान नहीं करते, आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन की मिलीभगत से किसानों का ‘रकबा समर्पण’ जानबूझकर करवाया जा रहा है ताकि धान की खरीदी कम की जा सके और अब अंतिम समय में टोकन काटने से भी मना किया जा रहा है।
जब बुजुर्ग किसान के सवाल पर गूंज उठी तालियां
बहस के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब तहसीलदार किसानों को समझाने की कोशिश कर रहे थे। मौके पर मौजूद एक बुजुर्ग किसान ने तहसीलदार की आंखों में आंखें डालकर सीधा सवाल किया— “साहब, आप किसानों का रकबा समर्पण करवा रहे हैं, क्या आप अपनी नौकरी समर्पण करेंगे?” किसान के इस तीखे सवाल ने तहसीलदार को निरुत्तर कर दिया, वहीं वहां मौजूद अन्य किसानों ने तालियां बजाकर इस सवाल का जबरदस्त समर्थन किया।
क्यों भड़का है संजारी बालोद में आक्रोश ?
- टोकन का संकट: खरीदी खत्म होने में महज 2 दिन बचे हैं, लेकिन सैकड़ों किसान टोकन के लिए भटक रहे हैं।
- रकबा समर्पण का खेल: विधायक का आरोप है कि तकनीकी खामियों और दबाव के चलते किसानों का रकबा कम किया जा रहा है।
- प्रशासनिक बेरुखी: किसानों का कहना है कि जब तक उनके एक-एक दाने की खरीदी सुनिश्चित नहीं होती, वे केंद्र से नहीं हटेंगे।
विधायक संगीता सिन्हा का ‘सीधा वार’:
“यह सरकार किसानों की मेहनत को लूटने पर उतारू है। जानबूझकर पोर्टल बंद किया जा रहा है और रकबे में कटौती की जा रही है। संजारी बालोद का किसान अकेला नहीं है, मै किसान भाइयों के साथ खड़ी हु। प्रशासन अपनी तानाशाही बंद करे।”







