नई पहल न्यूज नेटवर्क। बालोद। इसे सत्ता का रसूख कहें या प्रशासनिक नाकामी, लेकिन बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी चुनाव से जो तस्वीरें आ रही हैं, उसने चुनावी शुचिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आदर्श मतदान केंद्र क्रमांक 12 पर उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई, जब भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता मर्यादा की सारी सीमाएं लांघकर आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते पूरा मतदान केंद्र सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया और जमकर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला।
मैदान में उतरीं तेजतर्रार विधायक : बाहरी तत्वों और ‘तिलक पॉलिटिक्स’ पर घेरा
हंगामे की भनक लगते ही कांग्रेस की फायरब्रांड नेता, संजारी-बालोद विधायक और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने पोलिंग बूथ के भीतर बाहरी और असमाजिक तत्वों की मौजूदगी पर कड़ा ऐतराज जताया। यही नहीं, मतदान केंद्र की तय सीमा के भीतर मतदाताओं को तिलक लगाकर प्रभावित करने की रणनीति (तिलक पॉलिटिक्स) का उन्होंने पुरजोर विरोध किया।
विधायक सिन्हा ने भाजपा पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा:
भाजपा हार के डर से बौखला गई है। आदर्श आचार संहिता को मज़ाक बना दिया गया है और वोटर्स को खुलेआम प्रलोभन दिया जा रहा है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई सियासी तपिश : लाचार सिस्टम पर विधायक का बड़ा बयान
इस पूरे घमासान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। वीडियो में विधायक संगीता सिन्हा का आक्रोश सातवें आसमान पर दिख रहा है। शासन और प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए वे ऑन-कैमरा यह कहती नजर आ रही हैं:
यहाँ कोई नियम-कायदा नहीं बचा है। चूंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है, इसलिए कोई भी छोटा-बड़ा अधिकारी हमारी जायज शिकायत तक सुनने को तैयार नहीं है। प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक है।
महाभारत जारी, लेकिन ‘सिस्टम’ गायब: कहाँ सो रहे थे जिम्मेदार?
इस पूरी घटना का सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि जब दो प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आपस में टकरा रहे थे, गाली-गलौज और तीखी बहस हो रही थी, तब मौके से तमाम जिम्मेदार चुनाव अधिकारी और सुरक्षा का दावा करने वाली पुलिस नदारद थी। अधिकारियों की इस रहस्यमयी गैरमौजूदगी ने कांग्रेस के आरोपों को और हवा दे दी है।
पलारी का चुनावी पारा ‘हाई’
इस बखेड़े के बाद पलारी नगर पंचायत का चुनाव अब साख की लड़ाई बन चुका है। एक तरफ भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। अब देखना यह है कि इस वायरल वीडियो और विधायक के गंभीर आरोपों के बाद चुनाव आयोग क्या कड़ा एक्शन लेता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
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