डॉ. अम्बेडकर जयंती और बैसाखी के संयुक्त आयोजन से गूंजा परिसर, राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक विरासत की दिखी अनूठी झलक
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेंद्रगढ़। क्षेत्र के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल (DWPS), मनेंद्रगढ़ में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती और बैसाखी का पर्व एक साथ बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि समानता के दर्शन और परिश्रम की प्रचुरता का जीवंत प्रतीक बन गया, जिसने छात्रों के भीतर सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक गौरव की ज्योति प्रज्वलित कर दी।
श्रद्धांजलि और वैचारिक मंथन
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुआ। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. बसंत कुमार तिवारी ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर बौद्धिक चेतना का परिचय देते हुए:
- कक्षा 8वीं के छात्र आरव ने संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर के संघर्षमय जीवन और भारतीय संविधान में उनके अतुलनीय योगदान पर एक प्रभावशाली भाषण दिया।
- कक्षा 11वीं के छात्र जसराज ने बैसाखी के आध्यात्मिक और कृषि प्रधान महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे परिश्रम और समृद्धि का प्रतीक बताया।
सांस्कृतिक छटा: मंच पर उतरा ‘मिनी पंजाब’
बैसाखी के उल्लास को मंच पर जीवंत करते हुए कक्षा सातवीं की छात्राओं ने पंजाबी लोक नृत्य भांगड़ा और गिद्दा की ऐसी ऊर्जावान प्रस्तुति दी कि पूरा विद्यालय परिसर झूम उठा। रंग-बिरंगी वेशभूषा और लोक धुनों ने खेतों की हरियाली और किसान की मेहनत के उत्सव को साक्षात मंच पर उतार दिया।
प्रेरक उद्बोधन: “न्यायपूर्ण भारत और मेहनत की फसल”
संस्था के प्राचार्य डॉ. बसंत कुमार तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “बाबा साहब का संविधान हमें समता का दर्पण दिखाता है, तो बैसाखी हमें एकता का संदेश देती है। इन दोनों का संगम ही समृद्ध राष्ट्र का आधार है।” उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे भेदभाव मिटाकर राष्ट्र को गौरवान्वित करने का संकल्प लें।
संस्था की निदेशिका पूनम सिंह ने शुभकामनाएँ देते हुए इस संयोग को ‘विविधता में एकता’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा:
एक ओर डॉ. अम्बेडकर ने वंचितों के लिए शिक्षा के द्वार खोले, तो दूसरी ओर बैसाखी हमें सिखाती है कि धैर्य और परिश्रम से ही जीवन फलित होता है। हमें संविधान को हृदय में धारण कर शिक्षा के दीप से सामाजिक न्याय की ज्योति जलानी है।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने महापुरुषों के आदर्शों और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने का संकल्प लिया। इस संयुक्त आयोजन ने विद्यार्थियों के मन में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया। समारोह का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ गरिमापूर्ण ढंग से हुआ।
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