प्रशासनिक आदेशों की उड़ी धज्जियाँ; नए अधिकारी कर रहे प्रभार का इंतजार, कांग्रेस ने खोला मोर्चा
नई पहल न्यूज नेटवर्क। बैकुंठपुर/सोनहत। कोरिया वन मंडल में इन दिनों नियमों और सरकारी आदेशों को ताक पर रखने का एक अनोखा मामला सामने आया है। शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश यहाँ के कुछ रेंजरों के लिए महज ‘कागज का टुकड़ा’ बनकर रह गए हैं। आलम यह है कि तबादला हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पुराने अधिकारी अपनी कुर्सियां छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इस प्रशासनिक अराजकता ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आदेश के बाद भी प्रभार का ‘अकाल’
गौरतलब है कि बीते 25 फरवरी 2026 को वन विभाग में बड़े पैमाने पर रेंजर्स के तबादला आदेश जारी किए गए थे। नियमानुसार, आदेश जारी होने के तत्काल बाद नए अधिकारियों को प्रभार सौंप दिया जाना चाहिए था।
हैरानी की बात यह है कि नए पदस्थ रेंजर जिले में जॉइनिंग दे चुके हैं, लेकिन वे दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्हें प्रभार नहीं मिल रहा है, क्योंकि पुराने रेंजर अपनी ‘पकड़’ ढीली करने को तैयार नहीं हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि विभागीय कार्यों में भी गतिरोध पैदा कर रही है।
कांग्रेस ने कलेक्टर से की शिकायत, कार्रवाई की मांग
इस मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। जिला कांग्रेस प्रवक्ता अविनाश पाठक ने इस मुद्दे को लेकर सीधे कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई है। पाठक का कहना है कि:



जब शासन ने स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं, तो किसके संरक्षण में ये अधिकारी अपनी कुर्सियों पर जमे हुए हैं? यह सीधे तौर पर प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता को चुनौती देना है। हम मांग करते हैं कि जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।
मुख्य बिंदु: व्यवस्था पर बड़े सवाल
- 25 फरवरी: तबादले के आदेश की तारीख, जिसे एक माह से ज्यादा बीत चुका है।
- प्रभार का संकट: नए रेंजर जॉइनिंग के बाद भी ‘वेटिंग’ में, पुराने रेंजर ‘फील्ड’ में।
- लापरवाही की इंतहा: वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी से बढ़ रहा है संदेह।
क्या होगा अगला कदम ?
इस खबर के बाहर आने के बाद अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं। क्या इन ‘कुर्सी प्रेमी’ रेंजरों पर चाबुक चलेगा? क्या नए अधिकारियों को उनका कानूनी अधिकार और कार्यभार मिल पाएगा?
विभागीय सुस्ती और आदेशों की अवहेलना ने यह साफ कर दिया है कि कोरिया वन मंडल में ‘सिस्टम’ फिलहाल पटरी से उतरा हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गड़बड़ी को सुधारने के लिए कितनी फुर्ती दिखाता है।




