पूर्व सीएम भूपेश का वार : जनता को राहत तो अभिनंदन, वरना लानत
वित्त मंत्री का ओपी चौधरी का पलटवार : आपदा में वसूली करने वालों को जनता ने दिखाया बाहर का रास्ता
एक तरफ मोदी सरकार का आभार, दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर जुबानी जंग, प्रदेश की सियासत में ‘एक्साइज ड्यूटी’ ने बढ़ाई तपिश
नई पहल न्यूज नेटवर्क। रायपुर। देश में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) घटाने के केंद्र सरकार के फैसले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताए जाने के बाद, अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बीच सोशल मीडिया पर सीधा युद्ध छिड़ गया है। राजनीति के इस दंगल में ‘जनता की राहत’ और ‘पुरानी वसूली’ को हथियार बनाया जा रहा है।
भूपेश बघेल का कटाक्ष: “राहत मिले तो अभिनंदन, वरना…
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार के इस कदम पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर एक्साइज ड्यूटी घटाने से वास्तव में आम जनता को राहत मिली है, तो मुख्यमंत्री का नागरिक अभिनंदन किया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने एक शर्त भी जोड़ दी—”यदि जनता को राहत नहीं मिली है, तो उन्हें (सरकार को) लानत भेजी जाए।” बघेल के इस बयान ने भाजपा खेमे में हलचल पैदा कर दी है।
ओपी चौधरी का पलटवार: “आपदा में वसूली आपका इतिहास”



भूपेश बघेल के हमले का जवाब देने में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने कांग्रेस की इन्हीं हरकतों के कारण उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है। ओपी चौधरी ने पिछली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “कोविड जैसी वैश्विक आपदा के समय जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब भूपेश सरकार ने पेट्रोल पर वैट (VAT) बढ़ाकर जनता की जेब से वसूली की थी।”
फर्क साफ है: मोदी सरकार संकट में देती है साथ
वित्त मंत्री ने अपनी बात को पुख्ता करते हुए कहा कि आज जब दुनिया युद्ध और कठिन परिस्थितियों के कारण महंगे तेल से जूझ रही है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने देशवासियों पर बोझ कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी घटाई है। उन्होंने कटाक्ष किया कि “भूपेश बघेल को इस बात से तकलीफ हो रही है कि जनता को राहत मिल रही है। फर्क साफ है—एक समय आपदा को वसूली का अवसर माना गया, जबकि आज संकट के बीच भी राहत देने का संकल्प लिया गया है।”
खबर का सार :
छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर यह खींचतान पुरानी है, लेकिन इस बार एक्साइज ड्यूटी की कटौती ने दोनों पक्षों को आमने-सामने लाकर खड़ा कर दिया है। जहाँ सत्ता पक्ष इसे मोदी सरकार की ‘गारंटी’ और बड़ी राहत बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे केवल कागजी और प्रतीकात्मक मान रहा है।




