अहिंसा के पुजारी के अपमान का आरोप; कांग्रेस ने घेरा, पूछा क्या यही है विष्णु का सुशासन ?
नई पहल न्यूज नेटवर्क। मनेन्द्रगढ़|आज पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन कर रहा है और ‘शहीद स्मृति दिवस’ मना रहा है। अहिंसा के पुजारी और शहीदों के सम्मान में अब तक पूरे देश में यह दिन ‘शुष्क दिवस’ के रूप में मनाया जाता रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आई। भाजपा शासित छत्तीसगढ़ सरकार ने इस पवित्र दिन पर भी शराब दुकानों को खुला रखने का फैसला किया, जिसे लेकर अब सियासी संग्राम छिड़ गया है।
मनेन्द्रगढ़ में खुलेआम बिकी शराब, परंपरा टूटने से आक्रोश
आमतौर पर हर साल 30 जनवरी को शराब दुकानें पूरी तरह बंद रहती थीं, लेकिन आज मनेन्द्रगढ़ सहित जिले भर में शराब की दुकानें रोज की तरह खुली देखी गईं। सुशासन का नारा देने वाली सरकार के इस कदम से गांधीवादी विचारधारा के लोग और आम नागरिक हैरान हैं। लोगों का कहना है कि जिस दिन बापू को याद कर शांति और संयम का संकल्प लिया जाता है, उस दिन सरकारी संरक्षण में शराब बेचना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांग्रेस ने बोला हमला: भाजपा की कथनी और करनी में अंतर
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस प्रवक्ता पूनम सिंह ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए इसे गांधी जी और शहीदों का अपमान बताया है।
पूनम सिंह (प्रवक्ता, कांग्रेस) का बयान:
“यह बेहद शर्मनाक है कि जो भाजपा सरकार ‘विष्णु का सुशासन’ और सांस्कृतिक मूल्यों की बात करती है, उसने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि जैसे पवित्र दिन को भी ‘ड्राय डे’ घोषित नहीं किया। आज के दिन शराब दुकानें खुला रखना यह साबित करता है कि सरकार के लिए राजस्व, नैतिक मूल्यों और शहीदों के सम्मान से बड़ा है। छत्तीसगढ़ की परंपरा और बापू के आदर्शों को ताक पर रख दिया गया है।”
क्या बदल गई सरकार की नीति ?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि वर्षों से चली आ रही ‘शुष्क दिवस’ की परंपरा को इस साल तोड़ दिया गया? विपक्ष इसे सरकार की वैचारिक हार और केवल ‘सुशासन’ के खोखले नारों से जोड़कर देख रहा है।







