75 किमी का दुर्गम सफर, कच्ची पगडंडियां और हौसला, धुरबेड़ा और आदिंगपार पहुंचने वाली जिले की पहली कलेक्टर बनीं नम्रता जैन
नई पहल न्यूज नेटवर्क। नारायणपुर |शासन की योजनाओं को फाइलों से निकालकर धरातल पर उतारने के संकल्प के साथ नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने एक नई मिसाल पेश की है। जिले के सबसे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के ग्रामीणों ने उस वक्त अपनी आँखों पर यकीन नहीं किया, जब उन्होंने ज़िले की मुखिया को बिना किसी तामझाम के, साधारण मोटरसाइकिल पर कच्ची पगडंडियों और घने जंगलों को पार कर अपने बीच पाया। श्रीमती नम्रता जैन ग्राम आदिंगपार और धुरबेड़ा पहुँचने वाली जिले की पहली कलेक्टर बन गई हैं।
चुनौतियों को मात: 75 किलोमीटर का साहसिक दौरा
जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित इन अंदरूनी गांवों तक पहुँचना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। कलेक्टर नम्रता जैन ने न केवल इस दूरी को तय किया, बल्कि मोटरसाइकिल के जरिए सीधे ग्रामीणों के द्वार तक पहुँचीं। उनका यह दौरा प्रशासन के प्रति जनता के भरोसे को मजबूत करने वाला साबित हुआ।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर पैनी नज़र: बच्चों से पूछा पहाड़ा
कलेक्टर ने धुरबेड़ा पहुँचते ही बालक आश्रम छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने केवल व्यवस्थाएं ही नहीं देखीं, बल्कि एक शिक्षिका की भूमिका में नज़र आईं:
- शैक्षणिक स्तर की जाँच: बच्चों से अंग्रेजी के अक्षर और पहाड़े सुन कर उनकी शिक्षा की गुणवत्ता परखी।
- बुनियादी सुविधाओं का जायजा: भोजन की गुणवत्ता, पेयजल, स्वच्छता और शौचालयों का बारीकी से निरीक्षण किया।
- त्वरित समाधान: छात्रावास अधीक्षक की मांग पर शौचालय निर्माण, खेल सामग्री और अधीक्षक निवास के लिए तत्काल प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
चौपाल पर संवाद: ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निपटारा
ग्राम आदिंगपार में कलेक्टर ने सरपंच सुदनी ध्रुव और ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं।
- आंगनबाड़ी की पहल: कोड़नार आंगनबाड़ी के निरीक्षण के दौरान उन्होंने टीएचआर वितरण और साफ-सफाई की समीक्षा की। साथ ही, आश्रित ग्रामों में नए आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए तत्काल सर्वे के निर्देश दिए।
- विकास कार्यों की स्वीकृति: ग्राम कुतुल में ग्रामीणों ने बाजार शेड, पाइपलाइन मरम्मत और सीसी रोड की मांग रखी, जिसे कलेक्टर ने प्राथमिकता में लिया।
- रोजगार पर जोर: उन्होंने बेरोजगार युवाओं को आरसेटी (RSETI) के माध्यम से कौशल विकास कर मुख्यधारा से जोड़ने की सलाह दी।
भरोसे की नई किरण

अबूझमाड़ के इन अंदरूनी इलाकों में कलेक्टर की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन अब ‘पहुंच विहीन’ क्षेत्रों को अपनी प्राथमिकता में रख रहा है। बाइक से पहुंचे इस प्रशासनिक अमले को देखकर ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी है कि विकास अब उनके घर के दरवाजे तक भी पहुंचेगा।
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